राजस्थान के इतिहास के स्रोत पुरातात्विक • अभिलेखागारीय • साहित्यिक • मुद्राशास्त्रीय

⚡ Quick Revision • 1. राजस्थान का इतिहास, कला, संस्कृति, साहित्य, परम्परा एवं विरासत
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राजस्थान के इतिहास के स्रोत

पुरातात्विक • अभिलेखागारीय • साहित्यिक • मुद्राशास्त्रीय

(Sources of Rajasthan History: Archaeological, Archival, Literary and Numismatic) — समेकित संरचित नोट्स

1. राजस्थान के इतिहास के स्रोत — परिचय एवं वर्गीकरण

राजस्थान के इतिहास के पुनर्निर्माण हेतु उपलब्ध सामग्री को मुख्यतः चार वर्गों में बाँटा जाता है — पुरातात्विक (अभिलेख, ताम्र-पत्र, स्मारक आदि), अभिलेखागारीय (अभिलेखागार, ग्रन्थागार, संग्रहालय में सुरक्षित सामग्री), साहित्यिक (संस्कृत, हिन्दी, राजस्थानी, फारसी साहित्य) एवं मुद्राशास्त्रीय (सिक्के)।

स्रोत वर्ग

सम्मिलित सामग्री

पुरातात्विक स्रोत

खुदाई से प्राप्त सामग्री, अभिलेख (शिलालेख/प्रशस्तियाँ), ताम्र-पत्र, स्मारक, भवन, मूर्ति, चित्रकला

अभिलेखागारीय स्रोत

अभिलेखागारों/ग्रन्थागारों में सुरक्षित — फरमान, निशान, पट्टा, परवाना, रुक्का, बहियाँ, अर्जियाँ, खरीता, पांडुलिपियाँ, चित्रपोथियाँ; संग्रहालयों की सामग्री

साहित्यिक स्रोत

संस्कृत, हिन्दी (पिंगल), चारण/डिंगल, रासो, ख्यात, वात, जैन/प्राकृत तथा फारसी-उर्दू का ऐतिहासिक साहित्य

मुद्राशास्त्रीय स्रोत

आहत (पंचमार्क) मुद्राओं से लेकर रियासती सिक्कों तक; मुद्राओं का अध्ययन = न्यूमिस्मैटिक्स (मुद्राशास्त्र)

1.1 भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) एवं राजस्थान

विषय

विवरण

ASI की स्थापना

1861 ई. — अलेक्जेंडर कनिंघम के नेतृत्व में

राजस्थान में पुरातात्विक सर्वेक्षण का प्रारम्भ

1871 ई. — श्रेय ए.सी.एल. कार्लाइल को

ASI का पुनर्गठन

1902 ई. — जॉन मार्शल द्वारा

राजस्थान में पुरातत्व एवं संग्रहालय विभाग का गठन

1950 ई.

राजस्थान से जुड़े प्रमुख पुरातत्ववेत्ता

डी. सांकलिया, बी.एन. मिश्र, आर.सी. अग्रवाल, बी.बी. लाल, ए.एन. घोष, दयाराम साहनी, एस.एन. राजगुरु, डी.पी. अग्रवाल, विजय कुमार, ललित पाण्डे, जीवन खरकवाल

2. पुरातात्विक स्रोत (Archaeological Sources)

2.1 अभिलेख (Epigraphy) — सामान्य परिचय

विषय

विवरण

अभिलेखों का अध्ययन

'एपिग्राफी' कहलाता है

प्रकार

शिलालेख, स्तम्भ लेख, गुहालेख, मूर्तिलेख, पट्टलेख, ताम्र-पत्र आदि

प्राप्त सामग्री

वंशावली, तिथियाँ, विजय, दान, उपाधियाँ, शासकीय नियम, सामाजिक नियमावली, आचार संहिता, विशेष घटनाएँ

प्रशस्ति

किसी शासक की उपलब्धियों की यशोगाथा

सबसे प्राचीन अभिलेख

अशोक मौर्य के अभिलेख (ब्राह्मी लिपि)

भारत का प्रथम संस्कृत अभिलेख

शक शासक रुद्रदामन का जूनागढ़ अभिलेख (~150 ई.)

2.2 अभिलेखों की लिपियाँ — कालानुक्रमिक विकास

लिपि

काल / विशेषता एवं उदाहरण

हड़प्पाकालीन

कालीबंगा की मुद्राएँ (अब तक पढ़ी नहीं जा सकीं)

मौर्यकालीन ब्राह्मी

अशोक के अभिलेख (बैराठ, भाब्रू)

उत्तर-मौर्य ब्राह्मी

बड़ली, नगरी, घोसुण्डी, बड़वा, बरनाला आदि

कुटिल लिपि

ब्राह्मी का अलंकृत रूप; ब्राह्मी व नागरी के मध्य की कड़ी; गुप्तोत्तर/गुर्जर-प्रतिहार काल; अलंकरण से अक्षर-पहचान कठिन

हर्षकालीन नागरी

गुर्जर-प्रतिहार काल के समानांतर; 'कुटिल' का विकसित रूप

आधुनिक नागरी

पूर्व-मध्यकाल के बाद प्रचलन

अन्य लिपियाँ

खरोष्ठी (उत्तर-पश्चिमी भारत — अफगानिस्तान/पंजाब), अरमाइक, यूनानी; फारसी — मुगल काल में

2.3 प्राचीन एवं आरंभिक अभिलेख (ब्राह्मी-कालीन एवं यूप-स्तम्भ)

अभिलेख

तिथि/संवत्

स्थान

शासक/वंश

भाषा-लिपि एवं मुख्य महत्त्व

बड़ली शिलालेख

वि.सं. 527 (443 ई.पू.), उत्तर-मौर्यकालीन

अजमेर, बड़ली/कंकड़ी गाँव (भीलोट माता मंदिर परिसर)

ब्राह्मी; प्रदेश का सर्वाधिक प्राचीन ज्ञात लेख; राजस्थान में 'वीर (निर्वाण) संवत्' का प्रथम प्रयोग — महावीर के निर्वाण वर्ष से

बैराठ/विराटनगर (भाब्रू) अभिलेख

अशोक-कालीन

विराटनगर (कोटपूतली-बहरोड़)

अशोक मौर्य

प्राकृत, ब्राह्मी; अशोक से जुड़े दो लेख; भाब्रू लेख की खोज 1837 में कैप्टन बर्ट ने की; बौद्ध संघ/त्रिरत्नों के प्रति गहरी आस्था

घोसुण्डी शिलालेख

द्वितीय-प्रथम शती ई.पू. (~50 ई.पू.)

घोसुण्डी (चित्तौड़); वर्तमान में उदयपुर संग्रहालय

राजा सर्वतात

संस्कृत, ब्राह्मी; भागवत/वैष्णव परम्परा का सबसे आरंभिक साक्ष्य; संकर्षण-वासुदेव (कृष्ण-बलराम) पूजा, अश्वमेध यज्ञ एवं विष्णु मंदिर हेतु 'शिला-प्रकार' निर्माण का उल्लेख

नांदसा (गंगापुर) यूप-स्तम्भ लेख

225 ई.

भीलवाड़ा, नांदसा गाँव

शक्तिगुण

संस्कृत, ब्राह्मी; 'इकसठरात्र' सत्र तथा कृत/विक्रम संवत् का प्रयोग; तृतीय शती के दूसरे यूप लेख में भट्टिसोम — नांदसा को 'कोटीतीर्थ' कहा गया

बड़वा यूप-स्तम्भ अभिलेख

238–39 ई.

कोटा, बड़वा गाँव

मौखरी वंश

संस्कृत, उत्तरी ब्राह्मी; मौखरी राजवंश का ज्ञात प्राचीनतम लेख; तीन यूप-स्तम्भ एवं त्रिरात्र यज्ञ का विवरण

2.4 मौर्य (मोरी) एवं आरंभिक गुहिल-कालीन अभिलेख (6ठी–8वीं शती)

अभिलेख

तिथि/संवत्

स्थान

शासक/वंश

भाषा-लिपि एवं मुख्य महत्त्व

मनोहरस्वामी मंदिर के दो लघु लेख

वि.सं. 589 (532 ई.)

चित्तौड़

प्रान्तीय शासक अभयदत्त ('राजस्थानीय' पद का अधिकारी)

विष्णु मंदिर से संबद्ध; 'राजस्थानीय' शब्द का प्रथम प्रयोग; वराह के पौत्र विष्णुदत्त का नाम

बसन्तगढ़ लेख

625 ई. (वि.सं. 682)

बसन्तगढ़ (सिरोही)

चावड़ा (चापोत्कट) वंश — राज्जिल का पुत्र वर्मलात

संस्कृतयुक्त प्राकृत, ब्राह्मी; 'राजस्थानीयादित्य' शब्द का प्राचीनतम प्रयोग; सामन्त प्रथा पर प्रकाश

सामोली (सीलादित्य/कोटड़ा) शिलालेख

646 ई. (वि.सं. 703)

सामोली गाँव, भोमट तहसील (उदयपुर); अब अजमेर संग्रहालय (ओझा द्वारा सुरक्षित)

मेवाड़ के गुहिल राजा शीलादित्य

संस्कृत, कुटिल लिपि; अरण्यगिरि में ताँबे-जस्ते की खानों का उल्लेख; गुहिल-काल की आर्थिक-सामाजिक दशा

अपराजित का कुण्डाग्राम शिलालेख

661 ई. (वि.सं. 718)

नागदा के निकट, कुण्डेश्वर मंदिर

गुहिल नरेश अपराजित

'मंदिर' संज्ञा का प्रथम उल्लेख; सेनापति (शिवात्मज) वराहसिंह की पत्नी यशोमती द्वारा विष्णु मंदिर; प्रशस्ति दामोदर के पौत्र द्वारा; उत्कीर्णक — वत्स का पुत्र यशोभट्ट

मानमोरी अभिलेख

713 ई.

मानसरोवर झील तट, पुठौली-चंदेरिया (चित्तौड़गढ़)

मौर्य (मोरी)/ताक्क वंश — महेश्वर, भीम, भोज, मान

'अमृत-मंथन की कथा'; चित्तौड़ के चार मौर्य शासकों का उल्लेख; लेखक — नागभट्ट का पौत्र पुष्य; कर्नल टॉड द्वारा खोज, अनुवाद व प्रकाशन

कणसवा अभिलेख

738 ई. (वि.सं. 795)

कणसवा गाँव (कोटा), शिवालय

मौर्यवंशी राजा धवल

राजस्थान में मौर्य (मोरी) शासकों का अन्तिम उल्लेख

2.5 प्रतिहार एवं गुहिल-कालीन अभिलेख (9वीं–10वीं शती)

अभिलेख

तिथि/संवत्

स्थान

शासक/वंश

भाषा-लिपि एवं मुख्य महत्त्व

बुचकला अभिलेख

815 ई.

जोधपुर, बुचकला का पार्वती मंदिर

प्रतिहार नागभट्ट (द्वितीय), वत्सराज का पुत्र

बीस पंक्तियाँ, संस्कृत; जाबाली द्वारा मूर्ति-स्थापना; सूत्रधार देइआ

घटियाला के दो लेख

861 ई. (चैत्र शुक्ला 2, वि.सं. 918, बुधवार)

घटियाला (जोधपुर), 'माताजी की साल'

प्रतिहार कक्कुक; मूलपुरुष हरिश्चन्द्र ब्राह्मण

एक महाराष्ट्री प्राकृत में, एक संस्कृत (उत्तर भारतीय गद्य-पद्य चम्पू शैली); रोहिंसकूप में आभीरों के उपद्रव का निवारण; 'मग' ब्राह्मणों का उल्लेख; हरिश्चन्द्र ('रोहिल्लद्धि') की दो पत्नियाँ — ब्राह्मणी व क्षत्राणी, दोनों से प्रतिहारों की पृथक् शाखाएँ; कक्कुक को न्यायप्रिय शासक बताया; मंडोर प्रतिहारों की नामावली

मिहिरभोज की ग्वालियर प्रशस्ति

~880 ई. (तिथि-रहित)

ग्वालियर

गुर्जर-प्रतिहार मिहिरभोज

विशुद्ध संस्कृत, उत्कीर्ण ब्राह्मी; 17 श्लोक; गुर्जर-प्रतिहारों को लक्ष्मण का वंशज बताया; लेखक — भट्टधनिक का पुत्र बालादित्य

आहड़ (आदिवराह मंदिर) अभिलेख

वि.सं. 1001 (30 अप्रैल 944 ई.)

आहड़, आदिवराह मंदिर (उदयपुर)

गुहिल भर्तृभट्ट द्वितीय (खुम्माण तृतीय का पुत्र)

'पंचरात्र विधि' से पूजन का प्रथम उल्लेख; बारह वराह-प्रतिमाओं का उल्लेख; ब्राह्मी/तत्कालीन देवनागरी; प्रेरणा — नरहंस की पत्नी हंसी; गंगोद्भव कुंड

सारणेश्वर मंदिर प्रशस्ति

वि.सं. 1010 (953 ई.)

सारणेश्वर महादेव मंदिर, अशोकनगर (उदयपुर)

गुहिल अल्लट; माता महालक्ष्मी; पुत्र नरवाहन

संस्कृत, नागरी; 'देवकुल/देवकुलिका गोष्ठिक' का प्रथम सन्दर्भ; मेवाड़ का 10वीं सदी का इतिहास व कर-व्यवस्था; लेखक — कायस्थ पाल व वेल्लक

एकलिंगजी मंदिरस्थ नाथ प्रशस्ति

वि.सं. 1028 (971 ई.)

कैलाशपुरी, लकुलीश मंदिर (उदयपुर)

गुहिल नरवाहन

संस्कृत, देवनागरी; लकुलीश (पाशुपत) संप्रदाय का पुराना मंदिर (नाथप्रासाद); रचयिता — कवि आम्र (आदित्यनाग का पुत्र)

हर्षनाथ मंदिर प्रशस्ति

वि.सं. 1030 (975 ई.)

हर्षनाथ मंदिर, हर्ष (सीकर)

चौहान विग्रहराज द्वितीय

48 श्लोक/पद, संस्कृत; चौहान वंशक्रम — गूवक, चन्द्रराज, गूवक द्वितीय, चन्दन, वाक्पतिराज, सिंहराज, विग्रहराज; सिंहराज ने तोमर नायक सलवण को पराजित किया; पाशुपत सम्प्रदाय; 'वाग्भट' शब्द

आहड़ शक्तिकुमार लेख

वि.सं. 1034 (977 ई.)

आहड़, नागह्रद (नानिग) स्वामी मंदिर

गुहिल शक्तिकुमार

टॉड द्वारा प्राप्त; संस्कृत (हिन्दी अनुवाद सहित); गुहदत्त से गुहिलवंश; 'कटक' (सैनिक राजधानी) शब्द; अल्लट की माता महालक्ष्मी (राठौड़ वंश); अल्लट की रानी हरियादेवी (हूण राजकुमारी) ने हर्षपुर बसाया

2.6 परमार, चौहान एवं गुहिल-कालीन अभिलेख (11वीं–12वीं शती)

अभिलेख

तिथि/संवत्

स्थान

शासक/वंश

भाषा-लिपि एवं मुख्य महत्त्व

चरलू का लेख

1143 ई.

चरलू (छापर)

मोहिल

मोहिलों का स्मारक (देवली) लेख; 13वीं सदी पूर्व मोहिलों का अधिकार; मोहिलों की पहली राजधानी चरलू

हरिकेली नाटक प्रशस्ति

1153 ई.

अजमेर (ढाई दिन का झोंपड़ा); कुछ भाग ब्रिस्टल (लंदन) में राजा राममोहन राय की समाधि पर; अजमेर संग्रहालय में

चौहान विग्रहराज चतुर्थ (बीसलदेव)

विग्रहराज चतुर्थ रचित 'हरिकेली' नाटक चार पाषाण पट्टिकाओं पर उत्कीर्ण; चौहानों को सूर्यवंशी बताया

दिल्ली-शिवालिक (टोपरा) स्तम्भ लेख

1164 ई. (वि.सं. 1220)

टोपरा स्तम्भ — अब फिरोजशाह कोटला, दिल्ली

चौहान विग्रहराज चतुर्थ (बीसलदेव)

अशोक के टोपरा स्तम्भ पर उत्कीर्ण; तोमरों से दिल्ली-विजय एवं म्लेच्छ-निष्कासन का उल्लेख; उपाधि — 'कवि बांधव'

किराडू का लेख

1161 ई.

बाड़मेर

परमार

परमारों की उत्पत्ति गुरु वशिष्ठ के आबू यज्ञ (अग्निकुण्ड) से; उत्पलराज के पिता सिंधुराज को मारवाड़ का शासक बताया; प्रशस्तिकार — नरसिंह, लेखक — यशोदेव, उत्कीर्णक — यशोधर

बिजौलिया शिलालेख

वि.सं. 1226 (1170 ई.)

बिजौलिया (भीलवाड़ा)

चौहान सोमेश्वर

दिगम्बर जैन लेख; रचयिता — गुणभद्र, लेखक — कायस्थ केशव, उत्कीर्णक — गोविन्द व वेल्हण; पार्श्वनाथ मंदिर व कुण्ड-निर्माण; चौहानों की उत्पत्ति वत्सगोत्रीय ब्राह्मण (आदिपुरुष वासुदेव चहमान), शाकम्भरी/साँभर में राज्य-स्थापना; विग्रहराज (चतुर्थ) ने दिल्ली अधीन की; 'डोहली' (भूमि अनुदान), 'प्रतिगण' (गाँव-समूह), 'महत्तम/पारिषदी' (अधिकारी); अनेक प्राचीन स्थलों के नाम

2.7 मध्यकालीन अभिलेख (13वीं–14वीं शती)

अभिलेख

तिथि/संवत्

स्थान

शासक/वंश

भाषा-लिपि एवं मुख्य महत्त्व

लूणवसही (आबू-देलवाड़ा) प्रशस्ति

वि.सं. 1287 (1230 ई.)

आबू, देलवाड़ा — नेमिनाथ मंदिर

वस्तुपाल-तेजपाल

संस्कृत गद्य; वस्तुपाल-तेजपाल द्वारा नेमिनाथ मंदिर; आबू के परमार वंश का वर्णन; 'तपोधन गूगली' ब्राह्मण; 'कोटकी' (12 गाँवों का समूह); 'गोष्ठिका' (मंदिर प्रबंध समिति)

सुण्डा पर्वत शिलालेख

वि.सं. 1319 (1262 ई.)

सुण्डा (सुगंधाद्रि) पर्वत, नाडौल-जालौर

चौहान चाचिगदेव

दो शिलाखण्डों में; संस्कृत, देवनागरी; नाडोल के लक्ष्मण, सोढल; अल्हणदेव, केल्हण, उदयसिंह की विजयें; चाचिगदेव ने तुरुष्कों को पराजित किया; प्रशस्तिकार — जैन साधु जयमंगलाचार्य; उत्कीर्णक — विजयपाल का पुत्र सूत्रधार

चीरवा अभिलेख

वि.सं. 1330 (1273 ई.)

चीरवा (उदयपुर)

गुहिल समरसिंह

36 पंक्तियाँ, 51 श्लोक, संस्कृत, देवनागरी; बापा रावल से समरसिंह तक मेवाड़ गुहिलवंश की जानकारी; 'तलारक्षा/तलारसंघ' (नगर-रक्षक/कोतवाल-समकक्ष); सती प्रथा; एकलिंगजी के पाशुपत योगी शिवराशि; प्रशस्तिकार — रत्नप्रभसूरि (चैत्रगच्छ), शिल्पी — देल्हण

अचलेश्वर लेख

1285 ई.

आबू, अचलेश्वर मंदिर (बाल मठ)

बापा से समरसिंह तक

गुहिल वंशावली; 'मेदपाट' (मेवाड़) नाम की व्युत्पत्ति — बापा द्वारा दुर्जनों के संहार से मेद (चर्बी) से भूमि गीली; हारीत ऋषि का तप; नागदा नगर का उल्लेख; लेखक — वेदशर्मा नागर

हम्मीर के शिलालेख (दो)

सं. 1345 (1288 ई.) व सं. 1349 (1292 ई.)

रणथम्भौर

चौहान वाग्भट, जैत्रसिंह, हम्मीर

रणथम्भौर के तीन राजाओं के नाम; जैत्रसिंह ने मालवा राजा को पराजित किया; हम्मीर ने अर्जुन (कूमराज) को हराकर मालवा से लक्ष्मी छीनी; कर्करालगिरि आदि विजयें; मंत्रिमुख्य — कायस्थ (कटारिया) नरपति; लेखक — वीजादित्य; द्वितीय (माघ शुक्ला षष्ठी; बलबन का शिलालेख) — 1288-92 की राजनीतिक-धार्मिक स्थिति

2.8 मेवाड़ (कुम्भा-काल) एवं 15वीं शती के अभिलेख

अभिलेख

तिथि/संवत्

स्थान

शासक/वंश

भाषा-लिपि एवं मुख्य महत्त्व

पदराड़ा (पदराणा) का लेख

1433 ई.

पदराड़ा

महाराणा कुम्भा

कुम्भा-कालीन प्रथम लेख; संस्कृत गद्य; कुम्भा द्वारा राज्य-प्राप्ति के बाद विद्रोहियों का दमन; रचना — कविराज विलास योगेश्वर के पुत्र फूना; अंतिम शब्द 'व दूसरा'; स्थान-नाम 'पूरकेद्रप'

रणकपुर प्रशस्ति

1439 ई.

रणकपुर (पाली), जैन चौमुख (चतुर्मुख) मंदिर

महाराणा कुम्भा; धरणक (धरणा) सेठ

बापा (बप्पा रावल) से कुम्भा तक वंशावली; गुहिल को बापा का पुत्र बताया; कुम्भा की विजयें — आबू, सारंगपुर, नागपुर (नागौर), गागरोन, नराणा, अजमेर, मंडोर, मांडलगढ़ आदि; 'हिन्दू सुरताण' पदवी (केवल इसी प्रशस्ति में); प्रशस्तिकार — महेश भट्ट; शिल्पी — दीपा

चित्तौड़गढ़ कीर्तिस्तम्भ प्रशस्ति

1460 ई.

चित्तौड़गढ़, कीर्तिस्तम्भ (विजय स्तम्भ)

महाराणा कुम्भा

चौंसठ श्लोक, संस्कृत, देवनागरी; बापा से कुम्भा तक गुहिल वंशावली; कुम्भा-रचित ग्रंथों — चण्डीशतक, गीतगोविन्द टीका, संगीतराज — का वर्णन; कुम्भा की उपाधियाँ व विजयें; रचयिता — महेश (अत्रि का पुत्र)

कुम्भलगढ़ (पृथ्वी ब्रह्म) शिलालेख

1460 ई.

कुम्भलगढ़ / एकलिंगजी

महाराणा कुम्भा

पाँच शिलाओं पर, 270 श्लोक; एकलिंगजी मंदिर व कुटिला नदी; चित्रांग ताल; बापा को विप्रवंशीय (ब्राह्मण) बताया; बापा को हारीत की कृपा से राज्य-प्राप्ति; कुम्भा की विजयें; उपाधि 'महाराजाधिराज' व 'हिन्दू सुरताण'; रचयिता — महेश

खजूरी शिलालेख

1506 ई.

खजूरी (बूंदी)

बूंदी का स्वामी सूरजमल (हाड़ा)

गद्यमय संस्कृत; बूंदी के हाड़ाओं का इतिहास; बूंदी का प्राचीन नाम 'वृन्दावती'

2.9 मेवाड़, मारवाड़ एवं वागड़ के अभिलेख (16वीं शती से आधुनिक काल)

अभिलेख

तिथि/संवत्

स्थान

शासक/वंश

भाषा-लिपि एवं मुख्य महत्त्व

विराटनगर/बैराठ जैन मंदिर लेख

शक संवत् 1509 (1587 ई.)

विराटनगर (कोटपूतली-बहरोड़)

इन्द्रराज; अकबर; हरविजय सूरि

इन्द्रराज द्वारा तीन तीर्थंकर मूर्तियाँ (चन्द्रप्रभ मूर्ति पीतल की); हरविजय सूरि द्वारा स्थापना; अकबर द्वारा हरविजय सूरि को 'जगद्गुरु' उपाधि व 106 दिन जीवहत्या-निषेध; अकबर को महान् विजेता कहा

बीकानेर (रायसिंह) प्रशस्ति

1594 ई.

बीकानेर दुर्ग द्वार

राव बीका से रायसिंह तक

संस्कृत; रायसिंह की विजयें (काबुलियों, सिंधियों, कच्छियों पर); दुर्ग-निर्माण 1589–1594; दुर्ग का दूसरा नाम 'जूनागढ़'; प्रशस्तिकार — जैन मुनि जैता (जइता)

आमेर का लेख

1612 ई.

आमेर

कछवाहा मानसिंह (भगवंतदास का पुत्र)

जयपुर कछवाहा वंश हेतु 'रघुवंशतिलक' संबोधन; पृथ्वीराज से मानसिंह तक वर्णन; मानसिंह द्वारा जमुवा रामगढ़ प्राकार वाले दुर्ग, कुओं व बाग का निर्माण

जगन्नाथराय (जगदीश मंदिर) प्रशस्ति

1652 ई.

उदयपुर, जगन्नाथराय (जगदीश) मंदिर

महाराणा जगतसिंह

साठ श्लोक, संस्कृत, देवनागरी; बापा रावल से जगतसिंह सिसोदिया तक गुहिलों का वर्णन; बापा-मालवा युद्ध; प्रशस्तिकार — कृष्णभट्ट; शिल्पी — नाथू गौड़; जगतसिंह द्वारा मंदिर-निर्माण

राजसिंह प्रशस्ति (राजप्रशस्ति)

1676 ई.

राजसमंद झील की 'नौ चौकी' पाल

महाराणा राजसिंह (बापा से जगतसिंह द्वितीय तक वर्णन)

25 श्याम (काली) शिलाओं पर उत्कीर्ण — सबसे बड़ी प्रशस्ति; 24 सर्ग, 1106 श्लोक; अमरसिंह की मुगल-मेवाड़ संधि; राजसिंह का किशनगढ़ की चारुमती से विवाह; रचयिता — रणछोड़भट्ट तैलंग

2.10 फारसी भाषा के प्रमुख अभिलेख

अभिलेख

तिथि

स्थान

मुख्य महत्त्व

अजमेर का लेख

1200 ई.

अजमेर

राजस्थान का प्राचीनतम फारसी अभिलेख; अबूबक्र नामक व्यक्ति; इल्तुतमिश के काल के अल अभीत व अली अहमद आदि नाम

पुष्कर के जहाँगीर महल का लेख

1615 ई.

पुष्कर

जहाँगीर द्वारा राणा अमरसिंह के राज्य पर विजय; 1637 ई. में पुष्टि; शाहजहानी मस्जिद (अजमेर) से भी संबंध

ह. मुइनुद्दीन चिश्ती की दरगाह का लेख

1628 ई.

अजमेर

चिल्ला-ए-चिश्त के प्रवेश में अंकित; महाबतखाँ को अजमेर का सूबेदार; शिकदार दौलतखाँ द्वारा चिल्ला-ए-चिश्ती निर्माण

2.11 अभिलेखों में प्राप्त महत्वपूर्ण शब्द, संस्थाएँ एवं माप

शब्द / संस्था

अर्थ / विवरण

अभिलेख (काल)

'राजस्थानीय'

प्रान्तीय शासक — शब्द का प्रथम प्रयोग

मनोहरस्वामी लेख (532 ई.)

'राजस्थानीयादित्य'

प्राचीनतम प्रयोग

बसन्तगढ़ अभिलेख (625 ई.)

'मंदिर'

संज्ञा का प्रथम उल्लेख

अपराजित का कुण्डाग्राम शिलालेख (661 ई.)

'पंचरात्र विधि'

पूजा-पद्धति का प्रथम उल्लेख

आहड़ आदिवराह मंदिर अभिलेख (944 ई.)

'देवकुल गोष्ठिक'

मंदिर प्रबंध समिति — प्रथम सन्दर्भ

सारणेश्वर प्रशस्ति (953 ई.)

'कटक'

सैनिक राजधानी

आहड़ शक्तिकुमार लेख (977 ई.)

'विंशोपक'

प्रचलित मुद्रा

नाडलाई (1143 ई.); अर्थूणा

'द्रम्म'

मुद्रा/सिक्का

नारलाई (1171 ई.) आदि

'डोहली'

भूमि-अनुदान की संज्ञा

बिजौलिया (1170 ई.)

'पंचकुल'

गाँव की सभा/समिति

नाडोल (1176 ई.)

'मेदपाट'

मेवाड़ — बापा द्वारा दुर्जन-संहार से चर्बी (मेद) से भूमि गीली

अचलेश्वर लेख (1285 ई.)

'हिन्दू सुरताण'

महाराणा कुम्भा की पदवी (केवल इसी में)

रणकपुर प्रशस्ति (1439 ई.)

'वृन्दावती'

बूंदी का प्राचीन नाम

खजूरी शिलालेख (1506 ई.)

'जगद्गुरु'

अकबर द्वारा हरविजय सूरि को दी गई उपाधि

विराटनगर लेख (1587 ई.)

2.12 प्राचीन → वर्तमान स्थान-नाम

प्राचीन नाम

वर्तमान नाम

जावालिपुर

जालोर

शाकम्भरी

साँभर

नड्डुल

नाडोल

ढिल्लिका

दिल्ली

श्रीमाल

भीनमाल

नागहद

नागदा

मांडलकर

मांडलगढ़

विंध्यवल्ली

बिजोलिया

अहिच्छत्रपुर

नागौर

खामणपुर

खमनोर

वृन्दावती

बूंदी

माडव्यपुर

मंडोर

2.13 प्रमुख 'प्रथम' तथ्य एवं राजवंशानुसार अभिलेख (त्वरित संदर्भ)

तथ्य

अभिलेख (काल)

राजस्थान का सर्वाधिक प्राचीन ज्ञात लेख

बड़ली अभिलेख (443 ई.पू.)

राजस्थान में 'वीर संवत्' का प्रथम प्रयोग

बड़ली अभिलेख

वैष्णव (भागवत) परम्परा का आरम्भिक साक्ष्य

घोसुण्डी शिलालेख

मौखरी वंश का प्राचीनतम लेख

बड़वा यूप-स्तम्भ (238–39 ई.)

अन्तिम मौर्यवंशी अभिलेख

कणसवा अभिलेख (738 ई.)

भारत का प्रथम संस्कृत अभिलेख

रुद्रदामन का जूनागढ़ अभिलेख (~150 ई.)

राजस्थान का प्राचीनतम फारसी अभिलेख

अजमेर का लेख (1200 ई.)

सबसे बड़ी प्रशस्ति (25 शिलाएँ)

राजप्रशस्ति, राजसमंद (1676 ई.)

कुम्भा-कालीन प्रथम लेख

पदराड़ा का लेख (1433 ई.)

मेवाड़ शासकों को क्षत्रिय कहने वाला लेख

चित्तौड़ शिलालेख (1278 ई.)

बापा को विप्रवंशीय (ब्राह्मण) बताने वाला लेख

कुम्भलगढ़ शिलालेख (1460 ई.)

हम्मीर (रणथम्भौर) के मंत्री

कायस्थ नरपति (हम्मीर शिलालेख)

राजवंश

प्रमुख अभिलेख (काल/शासक)

गुहिल वंश

सामोली (646, शीलादित्य); कुण्डाग्राम (661, अपराजित); आहड़ आदिवराह (944, भर्तृभट्ट); सारणेश्वर (953, अल्लट-नरवाहन); एकलिंगजी नाथ (971, नरवाहन); आहड़ देवकुलिका (977); शक्तिकुमार लेख (977); अम्बाप्रसाद (985); चीरवा (1273, समरसिंह); रसिया की छतरी (1274, नरवर्मा); अचलेश्वर (1285); रणकपुर (1439, कुम्भा); एकलिंग प्रशस्ति (1488)

चौहान (चहमान) वंश

हर्षनाथ (975, विग्रहराज II); किरणसरिया (999); सेवाड़ी (1090); नाडलाई (1132, रायपाल); हरिकेली (1153, विग्रहराज IV); बिजौलिया (1170, सोमेश्वर); किराडू शिव (1178); सुण्डा पर्वत (1262, चाचिगदेव); चित्तौड़ (1278, तेजसिंह); हम्मीर शिलालेख (1288)

प्रतिहार/गुर्जर-प्रतिहार

मण्डौर (685); घटियाला (801, 861, 1033); बुचकला (815, नागभट्ट); मण्डोर (837, बाउक); ग्वालियर प्रशस्ति (~880, मिहिरभोज); प्रतापगढ़ (946, महेन्द्रपाल); सीयडोनी (948, देवपाल); ओसिया (956, वत्सराज); राजौरगढ़ (960, मथनदेव); इंगनौड़ा (1133)

परमार वंश

चित्तौड़ (971, नरवर्मा); पाणाहेड़ा (1059); अर्थूणा (1079, 1109); झालरापाटन (1086); जालोर (1118); किराडू (1161); आबू धारावर्ष (1208); पटनारायण (1287); अचलेश्वर प्रशस्ति

सोलंकी/चालुक्य

चित्तौड़ कुमारपाल — 2 लेख (1150); साँभर का लेख (मूलराज); वनेश्वर प्रशस्ति (1561, सज्जनाबाई)

राष्ट्रकूट/राठौड़

धनोप (1006); हथूण्डी (996); सिवाणा (1537) व हीरावाड़ी (1540) — राव मालदेव; बीका स्मारक (1504); कोडमदेसर (1459)

अन्य

खजूरी (1506) — हाड़ा सूरजमल; पार्श्वनाथ (1416) व शांतिनाथ (1526) — जैसलमेर भाटी; माचेड़ी बावड़ी (1382) — बड़गूजर; चरलू (1143) व उँस्तरा (1192) — मोहिल; मौखरी — बड़वा यूप


2.14 ताम्र-पत्र (Copper Plates) — सामान्य परिचय

पक्ष

विवरण

मूल उद्देश्य

भूमि-दान से संबंधित लेख

भारत में प्रारंभ

सर्वप्रथम सातवाहन शासकों द्वारा (ब्राह्मणों/बौद्ध भिक्षुओं को भूमिदान)

प्रभाव

सामन्तवाद के विकास में सहायक; केन्द्रीय नियंत्रण शिथिल हुआ

2.15 राजस्थान के प्रमुख ताम्र-पत्र (कालक्रमानुसार)

ताम्र-पत्र

काल

संबंधित शासक

प्रमुख जानकारी

धूलेव का दान-पत्र

679 ई. (हर्ष संवत् का 23वाँ वर्ष)

महाराज भेटी (किष्किन्धा/कल्याणपुर)

भट्टिनाग ब्राह्मण को धर्मार्थ (उब्धारक गाँव का) भूमिदान; 'अश्वयुज संवत्सर' का उल्लेख

आहड़ ताम्र-पत्र

वि.सं. 1263 (1206 ई.)

सोलंकी भीमदेव द्वितीय

मूलराज से भीमदेव द्वितीय तक सोलंकी वंशावली; उपाधियाँ — 'परमेष्टितायक, महाराजाधिराज, परमेश्वर, अभिनव सिद्धराज'; मेदपाट (मेवाड़) मंडल के आहाड़ में ब्राह्मण रविदेव को अरहट, भूमि, कडवा क्षेत्र व मकान दान; 'सामंत' व 'ठक्कुर' शब्द

खेरादा ताम्र-पत्र

1437 ई.

महाराणा कुम्भा

शंभु को 400 टका का दान; एकलिंगजी में प्रायश्चित; तत्कालीन मुद्रा व धार्मिक स्थिति की जानकारी

चीकली ताम्र-पत्र

1483 ई.

किसानों से वसूली जाने वाली 'विविध लाग-बागों' का विवरण; पटेल, सुथार व ब्राह्मणों द्वारा खेती

पुर का ताम्र-पत्र

1535 ई.

महाराणा विक्रमादित्य

हाड़ी रानी कर्मावती (कर्णावती) के जौहर से संबद्ध; जौहर-प्रथा एवं चित्तौड़ के द्वितीय शाके का समय-निर्धारण

3. अभिलेखागारीय स्रोत (Archival Sources)

3.1 अभिलेख एवं पाण्डुलिपियाँ — सामान्य परिचय

पक्ष

विवरण

संग्रहालयों में संरक्षित

शिलालेख, सिक्के, ताम्रपत्र

अभिलेखागारों/ग्रन्थागारों में संरक्षित

ताड़पत्र, कपड़े व कागज पर लिखे लेख, पांडुलिपियाँ, बहियाँ, राजाज्ञाएँ, चित्रपोथियाँ, चित्र

सर्वाधिक प्राचीन पांडुलिपि

ई. 1060 (ताड़पत्र) — जैसलमेर का वृहद् ज्ञान भंडार

ताड़पत्र पांडुलिपियों का प्रमुख केंद्र

जैसलमेर (वृहद् ज्ञान भंडार)

कागज पांडुलिपियों के प्रमुख केंद्र

नागौर, बीकानेर, जयपुर व अजमेर के शास्त्र भंडार

भारत में कागज का प्रचलन

12वीं शताब्दी ई. से

कागज-पूर्व की पोथियाँ

भोजपत्र एवं ताड़पत्र पर

3.2 राजस्थान राज्य अभिलेखागार, बीकानेर

पक्ष

विवरण

स्थापना

सन् 1955, बीकानेर

विशेष उपलब्धि

देश का प्रथम डिजिटल अभिलेखागार

शाखाएँ

जयपुर, कोटा, उदयपुर, अलवर, भरतपुर, अजमेर

उपलब्ध अभिलेखों के प्रकार

गुप्तकाल व मध्यकाल के अभिलेख; फरमान, निशान, मंसूर; पट्टा, परवाना, रुक्का; बहियाँ, अर्जियाँ, खरीता; पानाड़ी, तोजी दी वरकी, चौपानिया, पंचांग

विशेष

कोटा रियासत का लगभग 300 वर्ष पुराना, हाड़ौती भाषा में लिखा अभिलेख

3.3 प्रमुख ग्रन्थ भण्डार, ग्रन्थागार एवं शोध संस्थान

संस्थान / स्थान

स्थापना

संस्थापक / प्रमुख तथ्य

जिनभद्रसूरि ज्ञान भण्डार, जैसलमेर

सं. 1500 (1443 ई.)

संस्थापक — खरतरगच्छाचार्य श्री जिनभद्रसूरि महाराज; जैसलमेर दुर्ग के संभवनाथ मंदिर के भूमिगत भंडार में; खंभात, पाटण, अंडलपुर आदि से संकलित ताड़पत्र, पांडुलिपियाँ व कागज पर लिखे ग्रंथ; राजस्थान का प्राचीनतम ग्रन्थ भंडार

राजस्थान प्राच्य विद्या प्रतिष्ठान, जोधपुर

1956 (मूल 1950)

1950 में 'संस्कृत मण्डल' (जयपुर) के रूप में प्रारंभ; 1954 में 'राजस्थान पुरातत्व मंदिर' के रूप में पुनर्गठन — निर्देशन मुनि श्री जिनविजय; 1956 से स्थायी विभाग 'राजस्थान प्राच्य विद्या प्रतिष्ठान'; शिलान्यास — 1 अप्रैल 1955, डॉ. राजेन्द्रप्रसाद (जोधपुर); उद्घाटन — 14 दिसम्बर 1958; मुख्यालय जोधपुर (दिसम्बर 1958 में जयपुर से स्थानांतरित); शाखाएँ — 1961-62: बीकानेर, कोटा, अलवर, उदयपुर, टोंक; 1962-63: चित्तौड़गढ़, भरतपुर; रिसर्च जर्नल 1984-85 से; संस्कृत/प्राकृत पांडुलिपियाँ

राजस्थानी शोध संस्थान, चौपासनी (जोधपुर)

22 अगस्त 1955

डॉ. नारायणसिंह भाटी; पत्रिका 'परम्परा'; 'राजस्थानी शब्दकोश' का प्रकाशन

पोथीखाना, जयपुर

सवाई जयसिंह काल (~1784) से

देश के समृद्ध ग्रन्थ-भंडारों में; जयपुर के प्रसिद्ध कारखानों में से एक; हज़ारों हस्तलिखित एवं चित्रित पांडुलिपियाँ; 'पोथीखाना' व 'पुस्तकालय' दोनों नाम

महाराजा मानसिंह पुस्तक प्रकाश शोध केन्द्र, जोधपुर

1805 (मेहरानगढ़)

महाराजा मानसिंह द्वारा 2 जनवरी 1805 को 'पुस्तक प्रकाश'; 1977 में महाराजा गजसिंह द्वारा वर्तमान नाम

सरस्वती भण्डार, उदयपुर

मारवाड़ी/मेवाड़ साहित्य; अमरविलास, अमरभूषण, राजसिंहाष्टक आदि पाण्डुलिपियाँ सुरक्षित

अनूप संस्कृत पुस्तकालय, बीकानेर

महाराजा अनूपसिंह (1669–98) के नाम पर; महाराजा गंगासिंह द्वारा नामकरण

सादूल (साडूल) राजस्थानी रिसर्च इंस्टीट्यूट, बीकानेर

1944 (एक विवरण में 1945)

महाराजा सादुलसिंह; डॉ. दशरथ शर्मा से संबद्ध; पत्रिका 'राजस्थान-भारती'; 'विशाल राजस्थानी शब्दकोश'

रुपायन संस्थान, बोरुन्दा (जोधपुर)

संस्थापक — कोमल कोठारी; लोक-संस्कृति शोध

चित्रशाला, बूंदी

चित्रकला संग्रह

प्रमुख चित्र संग्रहालय/ग्रंथागार: पोथीखाना (जयपुर), महाराजा मानसिंह पुस्तक प्रकाश (जोधपुर), सरस्वती भंडार (उदयपुर), चित्रशाला (बूंदी), माधोसिंह संग्रहालय (कोटा), अलवर संग्रहालय (अलवर)।

3.4 प्रमुख संग्रहालय — विशेष विवरण

संग्रहालय

विवरण

केन्द्रीय संग्रहालय (अल्बर्ट हॉल म्यूजियम), जयपुर

आधारशिला महाराजा सवाई रामसिंह द्वितीय (शासन 1835–80) के काल में; 1876 में नाम 'अल्बर्ट म्यूजियम'; भवन की रूपरेखा अंग्रेज इंजीनियर सर सैम्युअल स्विंटन जैकब ने तैयार की; 1887 में सर एडवर्ड ब्रैडफोर्ड द्वारा जनता हेतु उद्घाटन; 1950 में डॉ. सत्यप्रकाश श्रीवास्तव के नेतृत्व में राज्य-स्तरीय केन्द्रीय संग्रहालय का दर्जा; मुख्य आकर्षण — मिस्र की ममी; भवन इंडो-मुगल शैली में

विक्टोरिया हॉल म्यूजियम, उदयपुर

महाराणा फतेहसिंह (1884–1930) ने गुलाब बाग (उदयपुर) में महारानी विक्टोरिया की रजत जयंती पर स्थापना की; 1890 में नामकरण; उद्घाटन लॉर्ड लैंसडाउन द्वारा

राजकीय (राजपूताना) संग्रहालय, अजमेर

1902 में सर जॉन मार्शल के पुरातात्विक सर्वेक्षण से पृष्ठभूमि; 1908 में 'राजपूताना म्यूजियम' नाम; 19 अक्टूबर 1908 को अकबर के किले (मैगजीन) में विधिवत उद्घाटन; राजस्थान का प्राचीनतम संग्रहालय; प्रथम क्यूरेटर/अध्यक्ष — गौरीशंकर हीराचन्द ओझा; उत्तर-गुप्तकालीन लाल बलुआ पत्थर की स्थानक प्रतिमा (पाली से) जैसी सामग्री

डीग संग्रहालय

मीणा एवं बाद के काल की मूर्तियाँ; डीग महाराजा की वस्तुएँ

अनौ-झरना/अरण-झरण (द डेजर्ट म्यूजियम), जोधपुर

संस्थापक — कुलदीप कोठारी (कोमल कोठारी के पुत्र); मुक्त आकाश (Open Air) संग्रहालय; पारंपरिक ज्ञान-प्रणाली से जुड़े सीखने के अनुभव

भारतीय लोक कला मण्डल, उदयपुर

संस्थापक — देवीलाल सामर

3.5 संग्रहालय — स्थापना वर्षानुसार (त्वरित तालिका)

संग्रहालय

स्थापना वर्ष

केन्द्रीय अल्बर्ट म्यूजियम, जयपुर

1876

विक्टोरिया हॉल म्यूजियम, उदयपुर

1890

राजपूताना म्यूजियम, अजमेर

1908

सरदार म्यूजियम, जोधपुर

1909

राजकीय संग्रहालय, झालावाड़

1915

गंगा गोल्डन जुबली संग्रहालय, बीकानेर

1937

राजकीय संग्रहालय, अलवर

1940

राजकीय संग्रहालय, भरतपुर; राजकीय संग्रहालय, कोटा

1944

पुरातत्व एवं संग्रहालय विभाग, जयपुर

1950

राजस्थान राज्य अभिलेखागार, बीकानेर

1955

आहड़ संग्रहालय, उदयपुर

1961

मण्डोर संग्रहालय, जोधपुर

1968

कालीबंगा संग्रहालय, हनुमानगढ़

1985–86

युद्ध संग्रहालय, जैसलमेर

2015

3.6 संग्रहालयों का प्रशासनिक वर्गीकरण

स्तर

संग्रहालय

राज्य-स्तरीय

राजकीय केन्द्रीय संग्रहालय, अल्बर्ट हॉल, जयपुर

संभाग-स्तरीय

उदयपुर, जोधपुर, बीकानेर, कोटा, अजमेर, हवामहल (जयपुर), भरतपुर

जिला-स्तरीय

अलवर, डूंगरपुर, चित्तौड़गढ़, जैसलमेर, पाली, झालावाड़, सीकर

स्थानीय

आहड़ (उदयपुर), मण्डोर (जोधपुर), माउंट आबू (सिरोही)

3.7 सार्वजनिक एवं विशेष पुस्तकालय

पुस्तकालय

स्थापना

प्रमुख तथ्य

राजकीय महाराजा सार्वजनिक मण्डल पुस्तकालय, जयपुर

1652 (महाराजा सवाई मानसिंह)

सवाई (राम)सिंह द्वारा 1866 में विस्तार; वर्तमान भवन 1886 (महाराजा माधोसिंह)

राजकीय सार्वजनिक मण्डल पुस्तकालय, कोटा

1910

'पाश्चोनियन' के रूप में; 15 अगस्त 1956 को वर्तमान दर्जा

राजकीय सुमेर सार्वजनिक मण्डल पुस्तकालय, जोधपुर

1915

महाराजा सुमेरसिंह

राजकीय सार्वजनिक मण्डल पुस्तकालय, बीकानेर

1937

'किंग एडवर्ड जुबली'; 4 सितम्बर 1954 को वर्तमान भवन

संबंधित अधिनियम/नियम: राजस्थान सार्वजनिक पुस्तकालय अधिनियम, 2006; राजस्थान सार्वजनिक पुस्तकालय नियम, 2012; राजस्थान सोसायटी पंजीकरण अधिनियम, 1958।

विशेष पुस्तकालय: श्री सरस्वती पुस्तकालय, फतेहपुर (सीकर) — दुर्लभ प्राचीन साहित्य व पांडुलिपियाँ; भवानी परमानन्द राजकीय महाविद्यालय पुस्तकालय, झालावाड़ — फ्रांस के सम्राट नेपोलियन से संबंधित ग्रंथ; सरस्वती भण्डार, उदयपुर — मारवाड़ी साहित्य।

3.8 त्वरित स्मरण तथ्य (अभिलेखागार-संग्रहालय)

तथ्य

उत्तर

सर्वाधिक प्राचीन पांडुलिपि

ई. 1060 (ताड़पत्र), जैसलमेर

भारत में कागज का प्रचलन

12वीं शताब्दी से

देश का प्रथम डिजिटल अभिलेखागार

राजस्थान राज्य अभिलेखागार, बीकानेर (1955)

प्राचीनतम ग्रन्थ भंडार

जिनभद्रसूरि ज्ञान भंडार, जैसलमेर (1443 ई.)

राजस्थान का प्राचीनतम संग्रहालय

राजपूताना म्यूजियम, अजमेर (1908)

पुरातत्व एवं संग्रहालय विभाग का गठन

1950

अल्बर्ट म्यूजियम के संस्थापक

महाराजा सवाई रामसिंह (द्वितीय)

भारतीय लोक कला मण्डल (उदयपुर) के संस्थापक

देवीलाल सामर

रुपायन संस्थान, बोरुन्दा (जोधपुर) के संस्थापक

कोमल कोठारी एवं विजयदान देथा

'अनौ-झरना — द डेजर्ट म्यूजियम'

मुक्त आकाश (Open Air) संग्रहालय

'पोथीखाना' स्थित

जयपुर

प्राच्य विद्या प्रतिष्ठान का मुख्यालय

जोधपुर

चित्रशाला स्थित

बूंदी

बीकानेर महाराजा अनूपसिंह के नाम पर ग्रंथागार

अनूप संस्कृत पुस्तकालय

4. साहित्यिक स्रोत (Literary Sources)

राजस्थान के आरम्भिक साहित्य की रचना मुख्यतः संस्कृत और प्राकृत में हुई। मध्यकाल में अपभ्रंश से विकसित क्षेत्रीय बोलियों — मारवाड़ी, मेवाड़ी, ढूँढाड़ी, मेवाती, बागड़ी — में भी साहित्य रचा गया। इन स्रोतों से राजनीतिक, सामाजिक, धार्मिक तथा सांस्कृतिक जीवन की प्रचुर जानकारी मिलती है।

4.1 साहित्यिक स्रोतों का वर्गीकरण

स्रोत वर्ग

भाषा/माध्यम

कालखण्ड

मुख्य विशेषता

संस्कृत साहित्य

संस्कृत

प्राचीन काल से

राजवंशों का प्रामाणिक एवं प्रशस्तिमूलक इतिहास

हिन्दी साहित्य

पिंगल/ब्रज-मिश्रित

13वीं शती से

युद्ध, वीरता एवं वंश-वृत्तान्त

चारण साहित्य

डिंगल/पिंगल

मध्यकाल से

वीररस प्रधान; राजाओं की कीर्ति एवं शौर्य

रासो साहित्य

पिंगल/डिंगल

11वीं–18वीं शती

वीररस प्रधान महाकाव्यात्मक वृत्तान्त; राजाओं के युद्ध व वीरता

ख्यात साहित्य

राजस्थानी गद्य

16वीं शती से

विस्तृत इतिहास, वंशावली एवं प्रशस्ति-लेखन

वात साहित्य

राजस्थानी गद्य

संक्षिप्त ऐतिहासिक वृत्तान्त

जैन/प्राकृत/रास साहित्य

प्राकृत/पुरानी राजस्थानी

10वीं शती से

धार्मिक तथा ऐतिहासिक

फारसी-उर्दू स्रोत

फारसी

13वीं–18वीं शती

सल्तनत एवं मुगल आक्रमणों का समकालीन वर्णन

4.2 संस्कृत साहित्य

ग्रन्थ

रचयिता

विषय / विशेषता

पृथ्वीराज विजय

कश्मीरी पण्डित जयानक (भट्ट)

12वीं शती के उत्तरार्ध में रचित; पृथ्वीराज तृतीय (चौहान) की राजनीतिक-सांस्कृतिक उपलब्धियाँ तथा अजमेर के क्रमिक विकास हेतु अत्यन्त उपयोगी; ओझा द्वारा सटीक संपादित

हम्मीर महाकाव्य

नयनचन्द्र सूरि

लगभग 1400 ई. (वि.सं. 1542); रणथम्भौर के चौहानों का इतिहास तथा अलाउद्दीन खिलजी की रणथम्भौर विजय

राजवल्लभ

मण्डन

15वीं सदी का सैनिक संगठन, स्थापत्य कला तथा मेवाड़ की जानकारी; (मण्डन कृत संगीत राज भी)

राजविनोद

भट्ट सदाशिव

मेवाड़ के गुहिलों तथा 16वीं सदी के राजस्थानी समाज का चित्रण

एकलिंगमाहात्म्य

कान्ह व्यास

मेवाड़ के गुहिलों का इतिहास

कर्मचन्द वंशोत्कीर्तनकं काव्यम्

जयसोम

बीकानेर के राठौड़ों (मंत्री कर्मचन्द वंश) से सम्बन्धित; ओझा द्वारा संपादित

अमरकाव्य वंशावली

रणछोड़ भट्ट

मेवाड़ के गुहिल, विशेषकर महाराणा राजसिंह की गाथा

युद्ध-केन्द्रित प्रमुख ग्रन्थ (अलाउद्दीन के आक्रमणों से सम्बन्धित)

युद्ध

ग्रन्थ

रचयिता

रचनाकाल (वि.सं.)

चित्तौड़ युद्ध

पद्मावती चौपई

जिनप्रभ सूरि

1385

पद्मावत

मुहम्मद जायसी

1597 (1540 ई.)

रणथम्भौर युद्ध

हमीर महाकाव्य

नयनचन्द्र सूरि

1542

हमीरायण (अपरनाम 'राव हमीर देव चौपई')

भाण्डउ व्यास

1538

जालौर युद्ध

कान्हड़दे प्रबन्ध

कवि पद्मनाभ

1512

वीरमदे सोनीगरा री बात

अज्ञात

1761

4.3 हिन्दी (पिंगल) साहित्य

ग्रन्थ

रचयिता

विषय / सन्दर्भ

रणमल्ल छन्द

श्रीधर व्यास

पाटण के जफरखाँ और ईडर के रणमल के बीच युद्ध

गोराबादल पद्मनी चऊपई

हेमरत्न सूरि

अलाउद्दीन का चित्तौड़ आक्रमण एवं गोरा-बादल की वीरता

राव जैतसी रो छन्द

बीठू (बूदण) सूजा

कामरान एवं बीकानेर नरेश राव जैतसी के मध्य घमासान तथा जैतसी की विजय (डिंगल); टैसीटरी द्वारा संपादित

कान्हड़दे प्रबन्ध

पद्मनाभ

जालौर के कान्हड़दे व वीरमदे तथा अलाउद्दीन के संघर्ष

सूरजप्रकाश (सूरज प्रकास)

करणीदान (वि.सं. 1787)

जोधपुर के अभयसिंह राठौड़ का इतिहास

वंशभास्कर

सूर्यमल्ल मिश्रण

समग्र राजपूताना एवं बूँदी का विशेष इतिहास

हम्मीरायण

भाण्डउ व्यास (वि.सं. 1538); (एक परम्परा में बादर)

रणथम्भौर के चौहान, विशेषकर हम्मीरदेव

वीर विनोद

कविराज श्यामलदास

मेवाड़ राज्य का दरबारी इतिहास (हिन्दी); गुहिलों का इतिहास

राजरूपक (राज रूपक)

वीरभाण (चीरभाण चारण, वि.सं. 1745–93)

जोधपुर के राठौड़, विशेषकर अभयसिंह राठौड़

विरुद छतरही / किरतार (कितार) बावनी

दुरसा आढा

अमरसिंह राठौड़ (रासिंघोत) से सम्बन्धित

वीरमायणा

बादर (मंडाराम सेवग से भी जोड़ा जाता है)

दतला जोइया का मंडोर के राव जगमाल व वीरमजी से संघर्ष

रघुनाथ रूपक

मंछाराम (मंडाराम) सेवग; (एक परम्परा में भाण्डक व्यास)

मध्यकालीन (1770–1835) भक्ति काव्य

हाला झाला री कुण्डलिया

इसरदास (इंसरदान) बारहठ

4.4 चारण साहित्य

चारण शैली के साहित्य की रचना केवल चारणों ने ही नहीं की; राजपूत, ब्राह्मण, भोजक, ओसवाल आदि जातियों का भी विशेष योगदान रहा। इस परम्परा के सर्वाधिक प्रसिद्ध कवि सूर्यमल्ल मिश्रण हैं।

कविराज सूर्यमल्ल मिश्रण (बूँदी)

बिन्दु

विवरण

आश्रयदाता

बूँदी महाराव रामसिंह के दरबारी कवि

उपाधियाँ

'आधुनिक राजस्थानी काव्य के नवजागरण के प्रवर्तक', 'वीर रसावतार', 'भारत भूषण'; आधुनिक काल के प्रथम एवं डिंगल परम्परा के अन्तिम प्रमुख कवि

प्रमुख रचनाएँ

रामरंजाट, वंशभास्कर, बलवन्त विलास (रतलाम महाराजा बलवन्तसिंह का चित्रण), छन्दोमयूख (छन्दशास्त्र), वीर-सतसई, सतीरासो, धातुरूपावली एवं फुटकर कविताएँ

वंशभास्कर

सर्वप्रमुख ग्रन्थ — बूँदी राज्य का पद्यात्मक इतिहास (समग्र राजपूताना सहित); रचना महाराव रामसिंह की इच्छा से, रचनाकाल संवत् 1897; लगभग ढाई हजार पृष्ठ (एक विवरण में चार हजार पृष्ठों में सवा लाख छन्द); भाषा डिंगल/पिंगल + संस्कृत, प्राकृत, अपभ्रंश, पालि, अरबी-फारसी शब्द (अतः जटिल); 'विश्वकोषीय ऐतिहासिक ग्रन्थ'/'राजपूताने का महाभारत'; चार जिल्दों में प्रकाशित; दत्तक पुत्र मुरारिदान ने पूर्ण किया; टीकाकार कृष्णसिंह ने 'सच्चा इतिहास-लेखक' कहा; ओझा के गद्य-सारांश को गंगाप्रसाद ने 'वंश प्रकाश' नाम दिया — बूँदी का प्रामाणिक इतिहास

वीर-सतसई

दूसरा महत्वपूर्ण डिंगल ग्रन्थ — अधूरा; 'सतसई' = 700 दोहे, किन्तु केवल 288 दोहे (कुछ विवरणों में ~300); 1857 के विद्रोह के समय वीरों में शौर्य जगाने का सन्देश; डॉ. मोतीलाल मेनारिया के अनुसार गोठड़ा के भोमसिंह के रणभूमि छोड़ने से रचना बीच में छोड़ी; डॉ. सुनीति कुमार चटर्जी — सूर्यमल्ल 'Lay of the Last Minstrel' एवं 'Last of the Giants'

चारण / वेलि साहित्य — एक दृष्टि में

ग्रन्थ

रचयिता

सन्दर्भ

अचलदास खींची री वचनिका

शिवदास गाडण

गागरोन के अचलदास खींची तथा माण्डू सुल्तान होशंगशाह गौरी के बीच युद्ध एवं जौहर

विरुद छिहतरी; किरतार बावनी; राउ श्री सुरताण रा कवित्त; झूलणा रावत मेघा रा; दूहा सोलंकी वीरमदेव रा; अमरसिंहजी रा कवित; स्फुट कवित

दुरसाजी आढा

अनेक वीर-चरित

वेलि क्रिसन रुकमणी री

राठौड़ पृथ्वीराज (टैसीटरी द्वारा संपादित डिंगल ग्रंथ)

कृष्ण-रुक्मिणी प्रसंग

4.5 रासो साहित्य

लगभग ग्यारहवीं शताब्दी में जैन कवियों द्वारा रचित 'रास' साहित्य के आधार पर आगे चलकर 'रासो' साहित्य विकसित हुआ। रास, रासक और रासो आदिकालीन हिन्दी साहित्य के सर्वाधिक लोकप्रिय काव्य-रूप रहे हैं। आरम्भिक प्रमुख कृतियाँ — खुमाण रासो, बीसलदेव रासो, पृथ्वीराज रासो एवं विजयपाल रासो।

पृथ्वीराज रासो (चन्दबरदाई)

बिन्दु

विवरण

रचयिता

पृथ्वीराज चौहान के दरबारी कवि चन्दबरदाई (मूल नाम पृथ्वीराज/वलादि भट्ट बताया जाता है); पुत्र जल्हण ने पूर्ण किया; जनश्रुति — चन्दबरदाई व पृथ्वीराज के जन्म-मृत्यु की तिथियाँ एक ही

स्वरूप

पृथ्वीराज चौहान का जीवनचरित प्रस्तुत करने वाला महाकाव्य — लगभग एक लाख छन्द, 69 प्रस्ताव (समय); कवित्त (छप्पय) सर्वाधिक; वीर रस प्रधान

भाषा

पिंगल (राजस्थानी-मिश्रित ब्रजभाषा); प्राकृत, अपभ्रंश, अरबी-फारसी का प्रभाव

विषय

गुरु वशिष्ठ-विश्वामित्र द्वारा आबू के अग्निकुण्ड से चार अग्निवंशी राजपूत वंशों — गुर्जर-प्रतिहार (पड़िहार), परमार, सोलंकी (चालुक्य), चौहान — की उत्पत्ति; कैमास वध, षट्भुज-वर्णन, कनकावकथा, संयोगिता-हरण, तराइन युद्ध; गजनी में बन्दी पृथ्वीराज की शब्दभेदी बाण-विद्या ("चार बाँस चौबीस गज अंगुल अष्ट प्रमाण...") से गोरी-वध; अन्ततः पृथ्वीराज-चंद की परस्पर कटार से मृत्यु

ऐतिहासिकता-विवाद

जेम्स टॉड ने लगभग 3000 छन्दों का अंग्रेजी अनुवाद किया; फ्रांसीसी विद्वान गार्सां द तासी (1839 ई.) ने 12वीं शताब्दी की रचना बताया; ऐतिहासिकता का सर्वप्रथम विरोध — कविराज श्यामलदास ('पृथ्वीराज रासो की नवीनता' — हिन्दी सं. 1942, अंग्रेजी 1886); जर्मन विद्वान प्रो. बूलर ने 'पृथ्वीराज विजय' के आधार पर (1893, एशियाटिक सोसायटी को पत्र) बताया कि पृथ्वीराज के संगीताध्यापक का नाम पृथ्वीभट्ट था — 'पृथ्वीराज विजय' प्रामाणिक, 'रासो' सन्दिग्ध; पं. मोतीलाल मेनारिया — निर्माण-काल 18वीं शताब्दी विक्रमी; कई आधुनिक विद्वान — वि.सं. 1600 (सन् 1543) के आस-पास

अन्य प्रमुख रासो ग्रन्थ

रासो

रचयिता

विषय / विशेषता

खुमाण (खुम्माण) रासो

दलपत (दौलत) विजय (वि. 1725–60)

पिंगल; बापा रावल (सं. 791) से महाराणा राजसिंह (सं. 1709–37) तक मेवाड़ के राजाओं का वर्णन; क्षात्रधर्म, सैन्य-व्यवस्था, चित्तौड़ की सेना, दुर्ग व शस्त्रों की सजीव जानकारी — इसीलिए 'मेवाड़ का अलल्ल'; 17वीं–18वीं शती के मेवाड़ में पर्दा व सती-प्रथा प्रचलित; मुगल-मेवाड़ सम्बन्ध, हल्दीघाटी के समय प्रताप-अमरसिंह मिलन (डॉ. मोतीलाल मेनारिया संकलित)

बीसलदेव रासो

नरपति नाल्ह

अजमेर के चौहान बीसलदेव (विग्रहराज चतुर्थ) का धार के परमार राजा भोज की पुत्री राजमती से विवाह एवं राजमती का विरह

जवान रासो

सीताराम (रल्नू)

बोराज गढ़ (जयपुर राज्य) — खंगारोत कछवाहों का ठिकाना; वि.सं. 1843 में मराठा नेता महादजी सिंधिया के सेनानायक रायजी पटेल का आक्रमण — 'बोराज का घमासान युद्ध'; डॉ. राघवेन्द्रसिंह मनोहर के अनुसार जवानसिंह के शौर्य पर डिंगल काव्य; कछवाह, राठौड़, पंवार, भाभाई, गौड़ योद्धाओं का वर्णन

सगत रासो

गिरधर आसिया (वि.सं. 1920)

डिंगल; राणा प्रताप के छोटे भाई शक्तिसिंह का वर्णन (डॉ. कृष्णचन्द्र क्षोत्रिय सम्पादित)

हम्मीर रासो

जोधराज

हम्मीरदेव चौहान एवं अलाउद्दीन खिलजी का युद्ध

विजयपाल रासो

नल्लसिंह

पिंगल; विजयगढ़ (करौली राज्य) के यदुवंशी नरेश विजयपाल

शत्रुसाल रासो

डूंगरसिंह (दूंगरसी)

बूँदी के राव राजा शत्रुसाल

क्याम खाँ (खौं) रासो

— (दशरथ शर्मा द्वारा संपादित)

क्यामखानी वंश

4.6 ख्यात साहित्य (राजस्थानी गद्य)

विषय

विवरण

परम्परा का आरम्भ

मुगल बादशाह अकबर (1556–1605 ई.) के काल से — अबुल फ़ज़ल द्वारा 'अकबरनामा' की सामग्री जुटाने पर बादशाह के आदेश से रियासतों ने अपने राज्य/वंश का विवरण भेजा; लगभग प्रत्येक राज्य में ख्यात लिखी गई

'ख्यात' का अर्थ

'ख्याति प्रतिपादित करना' — विस्तृत इतिहास (प्रशस्ति-लेखन का विस्तृत रूप); 'वात' = संक्षिप्त इतिहास

लेखन शैली

प्रायः गद्य में; लेखक — वंश-परम्परागत मुसाहिब; उद्देश्य — आश्रयदाता की दैनिक डायरी लिखना

ख्यात के चार वर्ग

(1) इतिहासपरक, (2) वातपरक, (3) व्यक्तिपरक, (4) स्फुट ख्यात

सबसे प्राचीन एवं विश्वसनीय

मुहणोत नैणसी री ख्यात

महत्व

फारसी स्रोतों में अनुपलब्ध जानकारी ख्यातों से — जैसे राव मालदेव-शेरशाह का सुमेल (गिरी-सुमेल) युद्ध (डॉ. साधना रस्तोगी, 'मारवाड़ का शौर्य युग' — गिरी = घूघरा घाटी, सुमेल = कुचील); मानसिंह-उदयसिंह की उदयसागर की पाल पर भेंट का वर्णन नैणसी री ख्यात व आमेर की ख्यातों में

मुहणोत नैणसी (1610–1670 ई.)

बिन्दु

विवरण

परिचय

जन्म सं. 1667 में जालौर (जोधपुर राज्य); ओसवाल महाजन; पिता मुँहणोत जयमल — महाराजा सूरसिंह व गजसिंह प्रथम के देश-दीवाण

पद

महाराजा गजसिंह प्रथम एवं जसवंतसिंह प्रथम के काल (1638–1678 ई.) में हाकिम तथा देश-दीवान; जोधपुर राज्य के दीवान

अन्त

सं. 1723 में औरंगाबाद में जसवंतसिंह के अप्रसन्न होने पर नैणसी व भाई सुन्दरदास बन्दी — एक लाख का जुर्माना; फूलमाल गाँव के निकट दोनों भाइयों ने प्राणान्त (आत्महत्या) कर लिया

उपाधि

मुंशी देवीप्रसाद ने 'राजपूताने का अबुल फ़ज़ल' कहा; डिंगल गद्य के सिद्धहस्त लेखक

नैणसी री ख्यात

मारवाड़ी डिंगल गद्य; समस्त राजपूताना सहित जोधपुर के राठौड़ों का विस्तृत इतिहास; सिंध, गुजरात, मध्यभारत, महाराष्ट्र, हरियाणा का वर्णन; राजपूतों के 36 राजवंशों का विवरण; प्राच्य विद्या प्रतिष्ठान द्वारा चार जिल्दों में प्रकाशित; द्वितीय भाग ओझा द्वारा संपादित

मारवाड़ रा परगना री विगत

दूसरी कृति — 'गाँव री ख्यात'/'सर्वेक्षण' भी कहते हैं; 17वीं सदी के मारवाड़ का महत्वपूर्ण ग्रन्थ; परगनों की आमदनी, ठिकानों की रेख-चाकरी, भूमि की किस्म, फसल, सिंचाई-साधन, जातियों के घर व आबादी के आँकड़े — इसीलिए डॉ. मोतीलाल मेनारिया ने 'जोधपुर (मारवाड़) राज्य का गजेटियर' कहा; सम्पादन डॉ. नारायणसिंह भाटी — प्रथम भाग (1967): जोधपुर, सोजत, जैतारण; द्वितीय (1968): फलौदी, मेड़ता, सिवाणा, पोकरण; तृतीय (1974): सात परगनों का सार; 'गाँव री ख्यात' दो जिल्दों में

अन्य प्रमुख ख्यातें

ख्यात

लेखक/सम्पादक

राज्य / विशेषता

बांकीदास री ख्यात

बांकीदास

जोधपुर — 'जोधपुर राज्य की ख्यात' भी; मारवाड़ी/डिंगल गद्य; महाराजा मानसिंह से 1803 ई. में सम्पर्क — लाखपसाव प्राप्त, मानसिंह के भाषा-गुरु; सन् 1833 में राठौड़ों सहित अन्य वंशों का इतिहास; प्रसिद्ध गीत 'आयो अंगरेज मुलक रे ऊपर' से राजाओं को अंग्रेजों के विरुद्ध ललकारा; 26 कृतियाँ 'बांकीदास ग्रन्थावली' के 3 भागों में, 10 अप्रकाशित

दयालदास री ख्यात (बीकानेर रै राठौड़ा री ख्यात)

दयालदास

बीकानेर — नरेश रतनसिंह (1825–51), सरदारसिंह (1851–72), डूँगरसिंह (1872–87) के दरबारी लेखक; दो खण्ड (बीकानेर के राठौड़ों का इतिहास); 'देशवर्णन' व 'आर्यायोखान कल्पद्रुम' भी रचे; डॉ. दशरथ शर्मा द्वारा संपादित

मुण्डियार (मुगडवार) री ख्यात

नागौर के चारण कवि

मुण्डियार (नागौर) — जागीर चारणों की; 'राठौड़ों की ख्यात' भी कहलाती है; राव सीहा द्वारा मारवाड़ में राठौड़ राज्य-स्थापना से जसवंतसिंह प्रथम की मृत्यु तक; मुगल-मारवाड़ वैवाहिक सम्बन्ध — सलीम की माता जोधाबाई, मोटाराजा उदयसिंह की दत्तक बहिन (माता मालदेव की दासी)

4.7 जैन / प्राकृत / रास साहित्य

विषय

विवरण

परिभाषा

जैन धर्मावलम्बियों तथा उनसे प्रभावित साहित्यकारों द्वारा रचित — प्राकृत/जैन/रास साहित्य

'रास' का अर्थ

नृत्य, गायन एवं अभिनय — तीन कलाओं का समावेश

प्राचीनतम रास

त्रिपुरारण (त्रिपुरादग) रास — 905 ई. में भीनमाल के जैन कवि द्वारा

पुरानी राजस्थानी का प्राचीनतम रास/ग्रंथ

वज्रसेन (ब्रजसेन) सूरि रचित 'भरतेश्वर बाहुबलि घोर'

सर्वाधिक महत्वपूर्ण रास

शालिभद्र (शालिचन्द्र) सूरि कृत 'भरतेश्वर बाहुबलि रास' (सं. 1241)

काल

अधिकांश जैन साहित्य चौदहवीं शताब्दी के बाद का

प्रमुख जैन रचनाकार एवं कृतियाँ

रचनाकार

कृति

विशेषता

नयनचन्द्र सूरि

हम्मीर महाकाव्य

लगभग 1400 ई. में पूर्ण

उदयवंत (उद्योतन) सूरि

कुवलयमाला

प्राकृत कथा-ग्रंथ

मेरुतुंग

प्रबंध चिंतामणि

ऐतिहासिक प्रबंध

हरिभद्र (सूरि)

समराइच्चकहा, धूर्ताख्यान, यशोधरचरित, वीरांगकथा

प्राकृत साहित्य

राजशेखर

प्रबंधकोष

जयसिंह सूरि

हम्मीरमदमर्दन, कुमारपालप्रतिबोध, धर्मोपदेश माला

कल्याणमल; मलिक मुहम्मद जायसी

पद्मावत

जैनाचार्य कुशललाभ

ढोला मारु रा दूहा; माधवानल चौपई; तेजसार रास; अगड़दत रास; दुर्ग सप्तसती; जिनपालित-जिनरक्षित सधि; भवानी छंद

हेमचन्द्र

देशिनाम माला, शब्दानुशासन

व्याकरण-कोश

4.8 फारसी / उर्दू में लिपिबद्ध स्रोत

फारसी स्रोत सल्तनत एवं मुगल आक्रमणों के समकालीन, प्रायः 'आँखों देखे' वर्णन प्रस्तुत करते हैं।

अमीर खुसरो

बिन्दु

विवरण

परिचय

भारत में जन्मा प्रथम फारसी इतिहासकार; हिन्दी में काव्य रचने वाला प्रथम मुस्लिम कवि; आँखों देखा वर्णन; सती-प्रथा का उल्लेख

मिफ्ताह-उल-फुतूह (1291 ई.)

जलालुद्दीन खलजी के रणथम्भौर आक्रमण/चढ़ाई से सम्बन्धित

खजाइन-उल-फुतूह (तारीख-ए-अलाई / अलाईनामा)

अलाउद्दीन द्वारा गुजरात, चित्तौड़, मालवा, वारंगल विजय तथा उत्तरी अभियानों का वर्णन; 1303 ई. के चित्तौड़ अभियान (रतनसिंह-अलाउद्दीन युद्ध) व सती-प्रथा का उल्लेख

अन्य फारसी ग्रन्थ

ग्रन्थ

लेखक

विषय

तारीख-ए-फिरोजशाही

जियाउद्दीन बरनी

खलजी एवं तुगलक वंश; रणथम्भौर पर मुस्लिम आक्रमणों की जानकारी

तारीख-ए-मुबारकशाही

याहया बिन अहमद सिहनदी (सरहिंदी)

खलजी वंश के शासक एवं राजस्थान का इतिहास

तारीख-ए-शेरशाही

अब्बास खाँ सरवानी

शेरशाह-मालदेव सम्बन्ध; गिरी-सुमेल युद्ध (1544 ई.) का प्रत्यक्ष वर्णन

पद्मावत (1540 ई.)

मलिक मुहम्मद जायसी

पद्मिनी तथा चित्तौड़ नरेश रतनसेन की प्रेमकथा

तुहफे-ए-राजस्थान (तवारीख तुहफुत-ए-राजस्थान)

श्यामलदास के मार्गदर्शन में मौलवी मुहम्मद उबेदुल्लाह फरहती

19वीं शती; राजस्थान का इतिहास

अकबरकालीन एवं मुगलकालीन फारसी स्रोत

वर्ग

ग्रन्थ (लेखक)

आत्मकथाएँ

तुजुक-ए-बाबरी (बाबर); तुजुक-ए-जहाँगीरी (जहाँगीर); रुक्नउद्दीन-उल-आलमगीरी

जीवनियाँ

हुमायूँनामा (गुलबदन बेगम); तबकिरात-उल-वाकेयात (जौहर आफ़ताबची); तारीख-ए-रशीदी (मिर्ज़ा हैदर दुगलत)

सरकारी इतिहास

अकबरनामा एवं आइन-ए-अकबरी (अबुल फ़ज़ल); मासिर-ए-जहाँगीरी (कामगार हुसैन); इकबालनामा-ए-जहाँगीरी (मोतिमद खाँ); पादशाहनामा (अब्दुलहमीद लाहौरी); आलमगीरनामा (मुहम्मद काज़िम)

अन्य फारसी ग्रन्थ

खुलासात-उत-तवारीख (सुजानराय खत्री); फतूहात-ए-आलमगीरी (ईसरदास नागर); नुस्का-ए-दिलकुशा (भीमसेन बुरहानपुरी); अरब-ए-आलमगीरी (शहजादा औरंगजेब); मासिर-ए-आलमगीरी (साकी मुस्तैद खाँ); बाकियात-ए-आलमगीरी (आकिल खाँ राजी); मुन्तखाब-उल-लुबाब (खाफी खाँ); सियार-उल-मुताखरीन (गुलाम हुसैन); मुनव्वर-उल-कलाम (शिवदास); मुन्तखाब-उल-तवारीख (अब्दुल कादिर बदायूनी); तबकात-ए-अकबरी (निजामुद्दीन अहमद बख्शी); तारीख-ए-फरिश्ता (फरिश्ता); जखीरुल खवानीन (शेख फरीद भाखरी); मासिर-उल-उमरा (समसामुद्दौला शाहनवाज खाँ)

राजस्थान का सतत (लगातार) इतिहास

वाक्या-ए-राजपुताना (मुंशी ज्वालासहाय); तारीख-ए-राजस्थान (कालीराम कायस्थ); उमराय-ए-हनूद (मोहम्मद सईद अहमद); तारीख तुहफुत-ए-राजस्थान (मौलवी उबेदुल्लाह फरहती)

4.9 प्रमुख आधुनिक इतिहासकार

आधुनिक काल में कर्नल टॉड ने पहली बार राजस्थान के इतिहास को व्यवस्थित रूप में प्रस्तुत किया। हिन्दी में सर्वप्रथम मेवाड़ के सरकारी इतिहासकार श्यामलदास ने 'वीर विनोद' लिखा, जो टॉड के ग्रन्थ से अधिक प्रामाणिक माना जाता है। इस परम्परा को गौरीशंकर ओझा ने आगे बढ़ाया। अन्य — D.C. गांगुली (हिस्ट्री ऑफ परमारज, 1933), B.N. पुरी (द हिस्ट्री ऑफ गुर्जर-प्रतिहारज, 1957; अर्ली हिस्ट्री ऑफ राजस्थान), दशरथ शर्मा (अर्ली चौहान डायनेस्टीज, 1964), प्रतिपाल भाटिया (द परमारज, 1970), A.K. मजुमदार (द चालुक्याज ऑफ गुजरात), रोमा नियोगी (द हिस्ट्री ऑफ द गहड़वाल डायनेस्टी, 1959), गोपीनाथ शर्मा (राजस्थान का इतिहास, भाग-1, 1973)।

(1) कर्नल जेम्स टॉड (इंग्लैण्ड)

बिन्दु

विवरण

भ्रमण एवं सामग्री-संग्रह

1812–17 ई.; घोड़े पर घूम-घूमकर सामग्री जुटाने से 'घोड़े वाला बाबा' कहलाए

पॉलिटिकल एजेन्ट

8 मार्च 1818 — मेवाड़ एवं हाड़ौती (दक्षिणी-पश्चिमी राजपूताना के रेजीडेन्ट); 1822 तक उदयपुर में

गुरु

यति ज्ञानचन्द्र (जैन)

कृतियाँ

एनल्स एण्ड एण्टीक्विटीज ऑफ राजस्थान — भाग 1 (1829, निजी व्यय से), भाग 2 (1832); ट्रैवल्स इन वेस्टर्न इंडिया (यात्रा-वृत्तान्त; मृत्योपरांत 1839 में पत्नी द्वारा प्रकाशित; गुरु ज्ञानचन्द्र को समर्पित; केन्द्र-बिन्दु सौराष्ट्र); स्केच ऑफ दी इण्डियन डोज्ड (एनल्स के तृतीय भाग में)

हिन्दी अनुवाद

प्रथम — बलदेव प्रसाद मिश्र (1907–09); दूसरे भाग का कार्य पं. ज्वालाप्रसाद मिश्र व मुंशी देवीप्रसाद ने पूर्ण किया; 1961 में केशवकुमार ठाकुर द्वारा दोनों भाग एक ग्रन्थ में; ओझा द्वारा भी अनुवाद (प्राच्य विद्या प्रतिष्ठान)

(2) डॉ. एल.पी. टैसीटरी (इटली)

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विवरण

भारत आगमन

1914 ई. — रॉयल एशियाटिक सोसायटी, कलकत्ता के आमंत्रण पर

सहायक/संरक्षक

प्रमुख सहायक — रामकरण आसोपा; संरक्षक — बीकानेर महाराजा गंगासिंह (चारण साहित्य सर्वेक्षण का कार्य सौंपा); जैन आचार्य विजयधर्म सूरि से सम्पर्क

कृतियाँ

बार्डिक एण्ड हिस्टोरिकल सर्वे ऑफ राजपूताना (1917) — 25 गद्य + 32 पद्य ग्रन्थों की विवरणात्मक सूची (रॉयल एशियाटिक सोसायटी बंगाल के त्रैमासिक में 1918 में प्रकाशित); राजस्थानी चारण साहित्य एवं ऐतिहासिक सर्वे; पश्चिमी राजस्थानी का व्याकरण; डिंगल ग्रन्थों — बेलि क्रिसन रुकमिणी री, राव जैतसी रो छन्द, राव रतन महेसदासोत री वचनिका — का सम्पादन; रामचरितमानस, रामायण, महाभारत, इन्द्रिय पराजय, नासिकेत की कथा का इटली भाषा में अनुवाद

पुरातत्व योगदान

बीकानेर म्यूजियम की स्थापना; कालीबंगा (पूर्व-हड़प्पा सभ्यता) की सर्वप्रथम खोज; रंगमहल, बड़ापल, रतनाड़ आदि स्थलों की खोज

(3) गौरीशंकर हीराचन्द ओझा (सिरोही)

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विवरण

उपनाम

'राजस्थान का गिबन'

सेवा

प्रारम्भ में उदयपुर राज्य में; सं. 1965 (1908 ई.) में राजपूताना म्यूजियम, अजमेर के क्यूरेटर

प्रथम रचना

भारतीय प्राचीन लिपिमाला (लिपिशास्त्र) — 1894 ई.

प्रमुख मौलिक ग्रन्थ

राजपूताने का इतिहास (चार खण्ड); राजपूताने का प्राचीन इतिहास (1925); प्राचीन लिपिमाला; भारतीय प्राचीन लिपिमाला; सोलंकियों का इतिहास; सिरोही राज्य का इतिहास; बापा रावल का सोने का सिक्का; वीर शिरोमणि महाराणा प्रताप; मध्यकालीन भारतीय संस्कृति; उदयपुर राज्य का इतिहास (2 भाग); भारतवर्ष के प्राचीन इतिहास की सामग्री; कर्नल जेम्स टॉड का जीवनचरित; राजस्थान की ऐतिहासिक दन्तकथाएँ; नागरी अंक और अक्षर; डूँगरपुर, बाँसवाड़ा, बीकानेर (2 जिल्द), जोधपुर (2 जिल्द) व प्रतापगढ़ राज्यों के इतिहास

(4) कविराज श्यामलदास (शाहपुरा)

बिन्दु

विवरण

उपाधियाँ

महाराणा सज्जनसिंह ने 1879 में 'कविराज' उपाधि दी; ब्रिटिश सरकार ने जनवरी 1888 में 'महामहोपाध्याय' के साथ 'केसर-ए-हिन्द'; रॉयल एशियाटिक सोसायटी (ग्रेट ब्रिटेन-आयरलैण्ड व बंगाल) की सदस्यता; इटली की फेलोशिप

वीर विनोद

मेवाड़ का प्रामाणिक दरबारी इतिहास (हिन्दी; फारसी शब्दों की बहुलता); महाराणा सज्जनसिंह के आदेश पर लेखन; 'वाणी विलास' (सरस्वती भवन) पुस्तकालय व पृथक् 'इतिहास कार्यालय' — सचिव गौरीशंकर ओझा; 15 वर्ष में पूर्ण; सज्जनसिंह के काल तक का वर्णन; पाँच खण्डों में विभाजित (प्रथम भाग में 9, द्वितीय में 10–20 प्रकरण)

(5) डॉ. दशरथ शर्मा (चूरू)

बिन्दु

विवरण

संस्थान

1945 — 'सादूल (साईल) राजस्थानी रिसर्च इंस्टीट्यूट', बीकानेर; प्राच्य विद्या प्रतिष्ठान के निर्देशक; इण्डियन हिस्ट्री कांग्रेस के अध्यक्ष

कृतियाँ

राजस्थान थ्रू द एजेज (प्रधान सम्पादक, 1966); अर्ली चौहान डायनेस्टीज; लेक्चर्स ऑन राजपूत हिस्ट्री एण्ड कल्चर; सम्राट पृथ्वीराज चौहान तृतीय और उनका युग (1972); दयालदास री ख्यात (सं.); क्याम खाँ रासो; पंवार वंश दर्पण; इन्द्रप्रस्थ प्रबंध; अमराभिषेक काव्य; अनन्त कवि रचित मुद्राराक्षस; संगीत रघुनंदम

(6) पं. रामकरण आसोपा (1857–1943)

बिन्दु

विवरण

परिचय

जन्म 7 अगस्त 1857, बड्लू (मारवाड़); 1920–21 में कलकत्ता विश्वविद्यालय में राजस्थानी-डिंगल के प्रवक्ता; डॉ. टैसीटरी के प्रधान सहायक — उन्हें डिंगल का प्रारम्भिक ज्ञान करवाया; मृत्यु 1943

कृतियाँ

मारवाड़ का मूल इतिहास; मारवाड़ का संक्षिप्त इतिहास; नीमाज ठिकाना संख्वास का इतिहास; आसोप, पोकरण, नौबेडा का इतिहास; मारवाड़ी व्याकरण (प्रथम); गीता की मारवाड़ी टीका; डिंगल शब्दकोश (60,000 शब्द — अधूरा); राजस्कृत; सूरज प्रकास; नैणसी की ख्यात; बाँकीदास ग्रन्थावली (प्रथम भाग) — कुल लगभग 75 ग्रन्थों का लेखन, सम्पादन व अनुवाद

(7) पं. विश्वेश्वरनाथ रेउ (1890–1947)

बिन्दु

विवरण

परिचय

जन्म 2 जुलाई 1890, जोधपुर (कश्मीरी ब्राह्मण); प्रेरणा — कर्नल टॉड; ओझा से डिंगल, शिलालेख व मुद्राशास्त्र सीखे; 1911 में जोधपुर राज्य (महाराजा सुमेरसिंह के काल) की सेवा में — इतिहास कार्यालय में शोधपरक लेख; मृत्यु 1947

कृतियाँ

भारत के प्राचीन राजवंश; कॉइन्स ऑफ मारवाड़ (मारवाड़ के सिक्के); हिस्ट्री ऑफ द राष्ट्रकूट्स; मारवाड़ राज्य का इतिहास; राजा भोज (का सामाजिक-ऐतिहासिक सर्वे); विश्वेश्वर स्मृति (न्याय संहिता); राठौड़ वंश दर्पण

(8) मुंशी देवीप्रसाद (1848–1923)

बिन्दु

विवरण

परिचय

जन्म 18 फरवरी 1848, जयपुर (कायस्थ); पहले टोंक राज्य में, फिर वि.सं. 1936 में जोधपुर (महाराजा जसवंतसिंह के समय); 1879 — महकमा अपील के नायब; नैणसी को 'राजपूताने का अबुल फ़ज़ल' की संज्ञा इन्हीं ने दी; बाल-विवाह निषेध के समर्थक; दयानन्द सरस्वती के सम्पर्क में

कृतियाँ

मारवाड़ राज्य का इतिहास; जोधपुर राज्य का इतिहास; बाबरनामा, हुमायूँनामा, अकबरनामा, शेरशाहनामा, शाहजहाँनामा आदि का हिन्दी-उर्दू अनुवाद; हिन्दू सुपीरियारिटी (1906); भारतीय देश-रत्न; केसरीसिंह समर; नौलखा गाथा; राजपूताना में प्राचीन खोज

(9) डॉ. रघुवीरसिंह (सीतामऊ) एवं अन्य

इतिहासकार

विवरण

डॉ. रघुवीरसिंह (सीतामऊ)

जन्म 23 फरवरी 1908 (सं. 1964) — मृत्यु 13 फरवरी 1991; सीतामऊ के साहित्य-प्रेमी राजघराने से; आगरा वि.वि. से 'मालवा इन ट्रान्जीशन' पर डी.लिट. — भूमिका सर जदुनाथ सरकार ने लिखी; कृतियाँ — बिखरे फूल, सप्तदीप, शेष स्मृति, पूर्वमध्यकालीन भारत एवं मालवा में युगान्तर (सर्वोत्तम), मालवा इन ट्रान्जीशन (अंग्रेजी), पूर्व आधुनिक राजस्थान, दुर्गादास राठौड़

4.10 आधुनिक काल के प्रामाणिक शोधपूर्ण ग्रन्थ

ग्रन्थ

लेखक / सम्पादक

Rajputana Gazetteers, Mewar Residency

K.D. Erskine

A History of Rajasthan

Rima Hooja (रीमा हूजा)

Early Chauhan Dynasties

Dr. Dasharath Sharma

Rajasthan Through the Ages, Vol. I

Dr. D. Sharma (सं.)

The History of the Gurjar-Pratiharas (1975)

B.N. Puri

Rajasthan: Prehistoric and Early Historic Foundations

V.N. Misra

Mewar and the Mughal Emperors; Social Life in Mediaeval Rajasthan

Dr. G.N. Sharma

Durga Das Rathor

Dr. Raghuvir Singh Sitamau

Sawai Jai Singh

Dr. V.S. Bhatnagar

4.11 त्वरित पुनरावृत्ति — साहित्यिक स्रोत

तथ्य

विवरण

प्राचीनतम रास

त्रिपुरारण रास (905 ई., भीनमाल का जैन कवि)

पुरानी राजस्थानी का प्राचीनतम रास

वज्रसेन सूरि — भरतेश्वर बाहुबलि घोर

सर्वाधिक महत्वपूर्ण रास

शालिभद्र सूरि — भरतेश्वर बाहुबलि रास (सं. 1241)

सबसे प्राचीन एवं विश्वसनीय ख्यात

मुहणोत नैणसी री ख्यात

प्रथम मुस्लिम हिन्दी कवि

अमीर खुसरो

'राजस्थान का गिबन'

गौरीशंकर हीराचन्द ओझा

'राजपूताने का अबुल फ़ज़ल'

मुहणोत नैणसी (मुंशी देवीप्रसाद द्वारा)

'घोड़े वाला बाबा'

कर्नल जेम्स टॉड

'राजस्थान के इतिहास का पिता/पितामह'

कर्नल जेम्स टॉड

कालीबंगा का सर्वप्रथम खोजकर्ता

डॉ. एल.पी. टैसीटरी

टॉड के ग्रन्थ का प्रथम हिन्दी अनुवादक

बलदेव प्रसाद मिश्र (1907–09)

'मेवाड़ का अलल्ल'

खुमाण रासो

'जोधपुर राज्य का गजेटियर'

मारवाड़ रा परगना री विगत (डॉ. मोतीलाल मेनारिया के अनुसार)

'पृथ्वीराज विजय' के लेखक/भाषा

जयानक भट्ट / संस्कृत

'हम्मीरमदमर्दन' के लेखक

जयसिंह सूरि

'राजविनोद' के रचयिता

सदाशिव भट्ट

'राज रूपक' के लेखक

वीरभाण

'वंशभास्कर' के रचयिता

सूर्यमल्ल मिश्रण

चन्दबरदाई द्वारा रचित ग्रंथ

पृथ्वीराज रासो

'जवान रासो' किस युद्ध पर आधारित

बोराज का युद्ध (वि.सं. 1843)

'हम्मीरायण' के लेखक

भाण्डउ व्यास / बादर

मेवाड़ का प्रथम हिन्दी इतिहासकार

कविराज श्यामलदास (वीर विनोद)

इतिहासकार — एक पंक्ति में

इतिहासकार

पहचान

प्रमुख कृति

कर्नल टॉड

प्रथम व्यवस्थित (ब्रिटिश) इतिहासकार

एनल्स एण्ड एण्टीक्विटीज ऑफ राजस्थान

डॉ. टैसीटरी

इतालवी विद्वान, कालीबंगा-खोजकर्ता

बार्डिक एण्ड हिस्टोरिकल सर्वे ऑफ राजपूताना

गौरीशंकर ओझा

'राजस्थान का गिबन'

राजपूताने का इतिहास (चार खण्ड)

कविराज श्यामलदास

मेवाड़ का प्रथम हिन्दी इतिहासकार

वीर विनोद

डॉ. दशरथ शर्मा

चौहान-इतिहास विशेषज्ञ, आधुनिक इतिहासकार

अर्ली चौहान डायनेस्टीज; राजस्थान थ्रू द एजेज

रामकरण आसोपा

डिंगल/मारवाड़ी व्याकरणकार

मारवाड़ का मूल इतिहास

विश्वेश्वरनाथ रेउ

मुद्राशास्त्री

हिस्ट्री ऑफ द राष्ट्रकूट्स; कॉइन्स ऑफ मारवाड़

मुंशी देवीप्रसाद

नैणसी को 'अबुल फ़ज़ल' कहा

मारवाड़ राज्य का इतिहास

डॉ. रघुवीरसिंह

सीतामऊ राजघराना

मालवा में युगान्तर

श्यामलदास (फारसी पक्ष)

मेवाड़ इतिहासकार

तुहफे-ए-राजस्थान

5. मुद्राशास्त्रीय स्रोत (Numismatic Sources)

मुद्राओं (सिक्कों) के अध्ययन को न्यूमिस्मैटिक्स (मुद्राशास्त्र) कहते हैं। राजस्थान के पश्चिमी भाग में ई.पू. 400 से गुप्त साम्राज्य के पतन तक के प्राचीनतम सिक्के मिलते हैं।

5.1 आहत / पंचमार्क मुद्राएँ

पक्ष

विवरण

अन्य नाम

आहत मुद्रा / पंच-मार्क — ठप्पा मारकर बनाई जाने के कारण

औसत वजन

लगभग 3.2 ग्राम

साहित्यिक नाम

धरण, पुराण, कार्षापण

प्रचलन काल

लगभग 800 ई.पू. से 500 ई.पू. (छठी ई.पू. से द्वितीय सदी ई.पू. तक)

रैढ़ (टोंक) से प्राप्ति

3075 चाँदी के पंचमार्क सिक्के — भारत का सबसे बड़ा (पंचमार्क) संग्रह; 'धरण'/'पण' कहलाते; मौर्यकालीन

आहड़ से प्राप्ति

6 आहत मुद्राएँ; इंडो-ग्रीक मुद्राएँ भी; कुल लगभग 2744 आहत मुद्राएँ

'भूएड्डा'

कुषाणेतर कालीन सिक्के इस नाम से कहलाते

5.2 गणराज्यों के सिक्के

गण/प्रकार

क्षेत्र

विशेषता

मालवगण

रैढ़ / पूर्वी राजस्थान

'मालवानां जय' अंकित; नगर/कर्कोट नगर (टोंक-उणियारा); लगभग 6000 ताँबे के सिक्के; 1893 में कनिंघम की पुस्तक 'The Coins of the Hindu States of Rajputana'

यौधेय

उत्तर-पश्चिमी राजस्थान

ब्राह्मी लिपि में 'यौधेयानां बहुधान'; ई.पू. द्वितीय सदी; नदी व स्तम्भ की आकृति

राजन्य जनपद

पूर्वी राजस्थान

खरोष्ठी लिपि में 'राजन्य जनपदस्य'

सेनापति मुद्राएँ

रैढ़

6 समुदाय; ब्राह्मी लिपि; 'वच्छाघोष' लेख; ईसा पूर्व 3–2 सदी; नन्दी की आकृति

5.3 विभिन्न स्थलों से प्राप्त प्राचीन सिक्के

स्थल

संख्या

प्रकार

विशेषता

रंगमहल (हनुमानगढ़)

105

ताँबे — आहत व कुषाणकालीन

कनिष्क प्रथम (भाले पर, वायुदेव), 'ओडो-वायु', 'नानाइया'; हुविष्क, वाजिष्क, कनिष्क तृतीय, मूरण्डा

बैराठ (जयपुर)

36

8 पंचमार्क + 28 इंडो-ग्रीक

16 मुद्राएँ यूनानी शासक मिनेण्डर की

नागरी / विराटनगर

26

पंचमार्क + इंडो-ग्रीक

होलि, ओक्लीज, अपोलोडोटस, मिनेण्डर, एन्टीमेक्स, स्ट्रेटो, हरमेओ आदि

सांभर

लगभग 200

6 चाँदी पंचमार्क + 6 इंडो-सासानी

गुप्तों की मुद्रा अनुपस्थित; हुविष्क, कनिष्क तृतीय, यौधेय मुद्राएँ ('बबुधना'/'गण')

5.4 इंडो-ग्रीक, क्षत्रप, कुषाण एवं गुप्त सिक्के

इंडो-ग्रीक (द्विभाषी) सिक्के: बैक्ट्रिया में यूनानी लिपि; भारतीय क्षेत्र में अग्रभाग यूनानी व पृष्ठभाग खरोष्ठी/ब्राह्मी। इन्हीं द्विभाषी सिक्कों से खरोष्ठी व ब्राह्मी लिपि की पहचान संभव हुई। अपोलोडोटस प्रथम के चौकोर सिक्के के पृष्ठभाग पर कूबड़धारी वृषभ/वृक्ष व खरोष्ठी लेख।

शासक/वंश

धातु

विशेषता

कुषाण — विम कदफिसेस

सोना

भारत में स्वर्ण सिक्के चलाए; राजस्थान में खेतड़ी, जमवारामगढ़, बीकानेर से दफीने प्राप्त

कुषाण — कनिष्क प्रथम

सोना + ताँबा

केवल यूनानी लिपि (खरोष्ठी बंद); उपाधि — 'बेसीलिओस बेसीलिओं', 'शओनानो शओ' (शहनशाहों का शाह); सीधी मुद्रा, मुकुट, वेदी में हवन, कमर पर तलवार; पृष्ठभाग पर सूर्य, अग्नि, बुद्ध

कुषाण — हुविष्क

विविध

यूनानी लिपि; राजा को वेदी में आहुति देते नहीं दिखाया; पृष्ठभाग पर ईरानी/भारतीय देवी-देवता

क्षत्रप — नहपान, जयदामन, जीवदामन, रुद्रसिंह, सिंहसेन

चाँदी

पुष्कर (अजमेर), बाँसवाड़ा (सर्वानिया/सिवानिया ग्राम), नोह (भरतपुर), मथुरा से प्राप्त; भारतीय भाषा-लिपि को महत्व — खरोष्ठी + ब्राह्मी दोनों; भारतीय नाम; नहपान के सिक्के पर 'रजो क्षहरातस नहपानस'

गुप्तकालीन सिक्के: बुद्धवाली का टीबा (जयपुर), बयाना (भरतपुर), मोरोली (जयपुर), नलियासर (सांभर), रैढ़ (टोंक), अहेड़ा (अजमेर), भेड़ (टोंक), सायला व देवली (टोंक) से प्राप्त। 1962 में भेड़ से स्वर्ण मुद्राएँ। बयाना (भरतपुर) से लगभग 2000 मुद्राएँ (1921) — चन्द्रगुप्त प्रथम की 10, समुद्रगुप्त की 173, कुमारगुप्त व चन्द्रगुप्त द्वितीय की अनेक। शैलियाँ — 'ध्वज शैली', चन्द्रगुप्त विक्रमादित्य की 'छत्र शैली' व 'धनुर्धर शैली'।

5.5 इंडो-सासानी (गधिया), अरब एवं गुर्जर-प्रतिहार (आदिवराह) सिक्के

वर्ग

विवरण

इंडो-सासानी / गधिया सिक्के

छठी शताब्दी के बाद प्रचलित (हूणों से संबद्ध); मुख के गड़बड़/विकृत अंकन के कारण 'गधैया पैसा'/'गधिया मुद्रा'; पी.एल. गुप्त — 'गाझणक' से समीकरण; डॉ. वेब — फारस के बादशाह बहराम से; आहड़ के गंधर्वसेन से भी संबंध; धातु — रजत व ताम्र; बाद में तौल हेतु उपयोग; मेवाड़ के कई कस्बों के बाजारों से प्राप्ति

अरब गवर्नरों के सिक्के

फलौदी (जोधपुर) से प्राप्त; काल 8वीं–9वीं शताब्दी; अरबी लिपि में लेख

गुर्जर-प्रतिहार (आदिवराह) सिक्के

प्रचलनकर्ता — मिहिरभोज व विनायकपाल देव; अन्य नाम 'वराही द्रम्म', 'विनायक द्रम्म' (ठक्कर फेरू की 'द्रव्य परीक्षा' में उल्लेख); अग्रभाग — वराह (आदिवराह) आकृति, पृष्ठभाग — 'श्रीमदादिवराह' (दो पंक्तियाँ); प्राप्ति — जीरोता, गनेडी (सीकर), बालानी, ग्वालियर, खेड़ा (टोंक), सांभर, कानरपुरा, गेलर, द्यारामपुरा आदि

5.6 चौहानों के सिक्के एवं पृथ्वीराज–गौरी संयुक्त सिक्के

चौहानों के सिक्के सांभर-अजमेर तथा जालौर-नाडौल शाखाओं में मिलते हैं; इन पर द्रम्म, विंशोपक, रूपक, दीनार नामों का प्रयोग हुआ।

शासक/शाखा

विशेषता

अजयदेव (अजयराज)

'अजयप्रिय द्रम्म'/'अजयदेव द्रम्म' (नागरी); रानी सोमलदेवी (सोमलेखा) के नाम पर 'श्री सोमलदेवी' + अश्वारोही; अग्रभाग पर 'श्री अजयदेव' व चतुर्भुजी देवी; चाँदी/ताँबा

सोमेश्वर

वृषभ शैली व अश्वारोही शैली

पृथ्वीराज तृतीय

अश्वारोही, 'श्री पृथ्वीराज'; मुहम्मद बिन साम के साथ संयुक्त सिक्के

कीर्तिपाल (जालौर) / कल्हण (नाडौल)

पृथक् शाखाओं के सिक्के

पृथ्वीराज–मुहम्मद बिन साम संयुक्त सिक्के (1192 ई.)

अग्रभाग — अश्वारोही (भाला लिए) व 'श्री पृथ्वीराज' (नागरी); पृष्ठभाग — कूबड़धारी वृषभ व 'श्री महमद साम' (नागरी); अरबी में 'अस्सुलतान-अल-आजम-मुइनुद्दीन-वा-दीन...'; ऐतिहासिक महत्व — संकेत कि तराइन के द्वितीय युद्ध के बाद पृथ्वीराज को तत्काल गजनी न ले जाकर अजमेर में अधीनता की शर्त पर रखा गया

5.7 सल्तनत एवं मुगलकालीन सिक्के

वर्ग

विशेषता

मुस्लिमकालीन (आरंभिक)

कुतुबुद्दीन ऐबक द्वारा अश्वारोही सिक्कों पर नागरी में नाम; 'श्री हमीर', 'श्री मुहम्मद बिन साम'; बाद में मुहम्मद गौरी द्वारा नागरी बंद; मुहम्मद-बिन-साम के मिले-जुले सिक्के — 12वीं सदी, अश्वारोही शैली; 'टंका' एवं 'दिरहम'

खिलजीकालीन

रैढ़ (टोंक), सांगरपाटन, हर्ष (सीकर), कुन्दौर (सवाईमाधोपुर), फागी, जमवारामगढ़ (जयपुर), पल्लू (हनुमानगढ़), झालरापाटन (झालावाड़) से प्राप्त

फदिया सिक्के

चौहानों के ह्रास-काल से लगभग 1540 ई. तक; 'फदिया' नाम

गांगेयदेव के सिक्के

त्रिपुरी के कलचुरी शासक गांगेयदेव विक्रमादित्य (1015–1040); सोना, चाँदी, ताँबा; 'स्त्री संस्साहि' लेख

मुगलकालीन

अकबर द्वारा शेरशाह की मुद्रा-नीति का अनुसरण; 'इलाही' सिक्के; राजस्थानी संग्रहालय — बीकानेर, जोधपुर संग्रहालय (मेष, मिथुन, कर्क, सिंह राशि के सिक्के) में संगृहीत; औरंगजेब — 'आलमगीर शाह औरंगजेब'

5.8 रियासतों के सिक्के — एक नजर में

रियासत

प्रमुख सिक्के

मेवाड़

चित्तौड़ी, भीलाड़ी, उदयपुरी, मुगली सिक्का एलची, चांदोड़ी, स्वरूपशाही, ढींगला, शाहआलमी, भींडरिया, पद्मशाही (सलूम्बर, ताँबा), नाथद्वारिया, फतेहशाही, भोपालशाही, माधोशाही (शाहपुरा, ताँबा), ग्यारसंदा (शाहपुरा, सोना/चाँदी), शिर्षलिया (त्रिशूलिया)

डूंगरपुर

उदयशाही, त्रिशूलिया, पत्रीसीरिया, चित्तौड़ी, सालिमशाही

प्रतापगढ़

सालिमशाही, नया सालिमशाही, मुबारकशाही, सिक्का मुबारक लंदन

सिरोही

चाँदी का भीलाड़ी, ताँबे का ढब्बूशाही

जोधपुर

विजयशाही, भीमशाही, गजशाही, लल्लूलिया, लल्लूशाही, रूकरिया, ढब्बूशाही

किशनगढ़

शाहआलमी, चांदोड़ी

जैसलमेर

अखैशाही, मुहम्मदशाही, ताँबे का डोडिया

जयपुर

झाड़शाही, मुहम्मदशाही, हाली

अलवर

अखैशाही, रावशाही, मुहम्मद बहादुरशाह, ताँबे का रावशाही टक्का, अंग्रेजी पाव आना

बूंदी

रामशाही, हाली, कटारशाही, चेहरेशाही, पुराना रुपया, ग्यारह-सना

कोटा

मदनशाही, हाली, गुमानशाही

करौली

माणकशाही

धौलपुर

तमंचाशाही

5.9 त्वरित स्मरण तथ्य (मुद्राशास्त्र)

तथ्य

उत्तर

पंचमार्क सिक्कों का काल

800 ई.पू. – 500 ई.पू.

भारत का सबसे बड़ा पंचमार्क संग्रह

रैढ़ (टोंक) — 3075 सिक्के

'यौधेयानां बहुधान'

ई.पू. द्वितीय सदी (नदी/स्तम्भ आकृति)

यूनानी शासक मिनेण्डर की मुद्राएँ

बैराठ से (16 मुद्राएँ)

कुषाण सिक्कों की उपाधि

'बेसीलिओस', 'शओनानो शओ' (शहनशाहों का शाह)

क्षत्रप सिक्कों की लिपियाँ

खरोष्ठी + ब्राह्मी

आदिवराह सिक्कों के प्रचलनकर्ता

मिहिरभोज व विनायकपाल देव

पृथ्वीराज–गौरी संयुक्त सिक्के

1192 ई. (तराइन युद्ध के बाद); पृथ्वीराज अजमेर में ही रहे

'सिक्का एलची'

अकबर की चित्तौड़ विजय के उपलक्ष्य में

विजयशाही सिक्का

जोधपुर के महाराजा विजयसिंह (1780)

झाड़शाही सिक्का

जयपुर (6 टहनियों का झाड़ चिह्न)

राजस्थान में प्रथम 'कलदार'

1900 ई. (जयपुर)

इंडो-सासानी/गधिया सिक्के

छठी शताब्दी के बाद; हूणों से संबद्ध

स्वरूपशाही सिक्का

महाराणा स्वरूपसिंह (अंग्रेजों से संधि के बाद)

आलमशाही मुगलिया सिक्का

बीकानेर में प्रचलित

5वीं सदी के बाद राजस्थान में (हूणों के) आगमन का सूचक सिक्का

इंडो-सासानी (गधिया)

6. अभ्यासार्थ प्रश्न (विगत परीक्षाओं से, उत्तर सहित)

प्रश्न

उत्तर

परीक्षा/वर्ष

अगस्त 2023 में जोधपुर में आयोजित म्यूजियम एसोसिएशन ऑफ इंडिया के 76वें वार्षिक सम्मेलन का विषय

भारतीय ज्ञान परंपराएँ और संग्रहालय

Curator CAM 2023

डीग संग्रहालय के मुख्य संग्रह में शामिल

मीणा और बाद के काल की मूर्तियाँ

Curator CAM 2023

'अनौ-झरना — द डेजर्ट म्यूजियम' के लिए सही कथन

मुक्त आकाश संग्रहालय; पारंपरिक ज्ञान-प्रणाली से जुड़े अनुभव (a, b और d)

Curator CAM 2023

बीकानेर महाराजा अनूपसिंह के नाम पर ग्रंथागार

अनूप संस्कृत पुस्तकालय (उदय नारायण देव)

CET Grad. 2023

राजस्थान में पुरातत्व एवं संग्रहालय विभाग का गठन

1950 में

REET III Gr. 2023

उदयपुर में भारतीय लोक कला मण्डल के संस्थापक

देवीलाल सामर

Forester 2022

राजपूताना म्यूजियम (अजमेर) की स्थापना

1908 ई., अजमेर

Forester 2022; JEN Ele. Dip. 2022

अल्बर्ट म्यूजियम के संस्थापक

सवाई रामसिंह (द्वितीय)

'जिनभद्रसूरि ग्रंथ भंडार' स्थित है

जैसलमेर

उत्तर-गुप्त काल की स्थानक प्रतिमा (लाल बलुआ पत्थर) प्राप्त

पाली से

'पोथीखाना' स्थित है

जयपुर

Agri. Supervisor 2021

राजस्थान प्राच्य विद्या प्रतिष्ठान का मुख्यालय

जोधपुर

BSTC 2013

रुपायन संस्थान (बोरुन्दा) के संस्थापक

कोमल कोठारी

कनिष्ठ अनुदेशक मैके. 2019

चित्रशाला स्थित है

बूंदी

'हम्मीरमदमर्दन' के लेखक

जयसिंह सूरि

RAS 2007; PC 2018

'राजविनोद' के रचयिता

सदाशिव भट्ट

आर्थिक अन्वेषक 2018

मुहणोत नैणसी किस राज्य के दीवान थे

जोधपुर (मारवाड़)

Tax Assistant 2018

'राज रूपक' के लेखक

वीरभाण

महिला सुपरवाइजर 2018

'वंशभास्कर' के रचयिता

सूर्यमल्ल मिश्रण

RAS 2008

'पृथ्वीराज विजय' के लेखक

जयानक भट्ट

PSI 2001; RAS 2012

राजस्थान की सबसे प्राचीन ख्यात

मुहणोत नैणसी री ख्यात

Patwar 2011

चन्दबरदाई द्वारा रचित ग्रंथ

पृथ्वीराज रासो

RAS 1998; PC 2008

'पृथ्वीराज विजय' की भाषा

संस्कृत

Coll. Lect. Hist. 2016

'जवान रासो' किस युद्ध पर आधारित है

बोराज का युद्ध

Asst. Prof. Hist. II, 2024

'कान्हड़दे प्रबंध' के लेखक

पद्मनाभ

'हम्मीरायण' के लेखक

बादर / भाण्डउ व्यास

सही सुमेलित नहीं है — 'खुमाण रासो–करणीदान'

खुमाण रासो के रचयिता दलपत (दौलत) विजय हैं

5वीं सदी के बाद राजस्थान में हुए आगमन (हूण) को दर्शाने वाला सिक्का

इंडो-सासानी (गधिया)

यूनानी शासक मिनेण्डर की मुद्राएँ किस स्थल से मिलीं

बैराठ

Coll. Lect. Hist. 2016; CET Grad. 2023

मुगलों से मैत्रीपूर्ण संबंधों के दौरान जयपुर के कछवाहों द्वारा जारी सिक्के

झाड़शाही

CET Sr. Sec. 2023

प्राचीनतम 'पंचमार्क' सिक्कों का समय

800 ई.पू. से 500 ई.पू.

आलमशाही मुगलिया सिक्का कहाँ प्रचलित था

बीकानेर

ASI की स्थापना कब हुई

1861 ई. (अलेक्जेंडर कनिंघम)

राजस्थान में पुरातात्विक सर्वेक्षण (1871) का श्रेय

ए.सी.एल. कार्लाइल

'हरिकेली नाटक' के रचयिता

विग्रहराज चतुर्थ (बीसलदेव चौहान)

'हिन्दू सुरताण' की उपाधि किसे मिली

महाराणा कुम्भा (रणकपुर प्रशस्ति)

बूंदी का प्राचीन नाम

वृन्दावती (खजूरी शिलालेख)

अकबर ने किसे जगद्गुरु की उपाधि दी

हरविजय सूरि (विराटनगर लेख, 1587)

महाराणा प्रताप ने किस वर्ष छप्पन क्षेत्र में राज्य स्थापित किया

सं. 1642 (1585 ई.)

मोहिलों की पहली राजधानी

चरलू (छापर)

हरिकेली नाटक के अनुसार चौहान किस वंश के

सूर्यवंशी

बागड़ के परमार किसके वंशज

मालवा के वाक्पतिराज के द्वितीय पुत्र डम्बरसिंह

निम्न में से कौनसा ग्रंथ कुम्भा की रचना नहीं है

कलानिधि (कुम्भा की रचनाएँ — संगीतराज, रसिकप्रिया, सुधा प्रबंध, नृत्यरत्नकोष)

RAS Pre 2015

दिल्ली शिवालिक स्तंभ अभिलेख किस शासक के राज्यकाल में उत्कीर्ण कराया गया

चौहान विग्रहराज चतुर्थ (बीसलदेव)

RAS Pre 2015

युद्ध संग्रहालय किस जिले में स्थापित है

जैसलमेर (2015)

RAS Pre 2015

महाभारत और महाभाष्य दोनों में उल्लिखित प्राचीन नगर

मध्यमिका (नगरी), चित्तौड़गढ़

RAS Pre 2016

प्राचीन राजस्थान में भागवत सम्प्रदाय के प्रभाव की पुष्टि करने वाला अभिलेख

घोसुण्डी अभिलेख

RAS Pre 2016

राजस्थानी साहित्य की प्रारंभिक रचना 'हंसावली' के रचयिता

असाईत

RAS Pre 2016

'नेह तरंग' के रचयिता

बूँदी नरेश राव बुधसिंह हाड़ा (पिंगल काव्य)

RAS Pre 2021

'ललित विग्रहराज' नाटक के रचयिता

सोमदेव (विग्रहराज चतुर्थ के दरबारी कवि)

RAS Pre 2023

अरब यात्री सुलेमान किस प्रतिहार शासक के काल में भारत आया

मिहिरभोज प्रथम

RAS Pre 2023

टी.एच. हैण्डले ने किस पुरास्थल की पहचान बौद्ध कस्बे के रूप में की

नलियासर (सांभर)

RAS Pre 2024

ओझियाना (भीलवाड़ा) के उत्खनन में शामिल पुरातत्वविद्

बी.आर. मीणा एवं आलोक त्रिपाठी

RAS Pre 2024

सुमेलन (Match) — विगत परीक्षाएँ

पुस्तक

लेखक

टिप्पणी

A. हम्मीरायण

भाण्डउ व्यास (एक परम्परा में बादर)

RAS Pre 2015

B. वीरमायणा

बादर

RAS Pre 2015

C. रघुनाथ रूपक

मंछाराम (मंडाराम) सेवग

RAS Pre 2015

D. किरतार बावणी

दुरसा आढ़ा

RAS Pre 2015

पृथ्वीराज विजय

जयानक

Coll. Lect. 2007 — सही

पुरुष परीक्षा

विश्वासपति (विद्यापति)

हम्मीरमदमर्दन

जयसिंह सूरि

सही

संगीत राज

मंडन (महाराणा कुम्भा से भी संबद्ध)

सही

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