राजस्थान के मुख्य राजवंशों के प्रमुख शासकों की राजनीतिक एवं सांस्कृतिक उपलब्धियाँ, केंद्रीय सत्ता के साथ सहयोग एवं प्रतिरोध
राजस्थान के मुख्य राजवंशों के प्रमुख शासकों की राजनीतिक एवं सांस्कृतिक उपलब्धियाँ, केंद्रीय सत्ता के साथ सहयोग एवं प्रतिरोध
1. गुहिल/सिसोदिया वंश (मेवाड़)
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शासक |
समय/तिथि |
राजनीतिक उपलब्धियाँ |
सांस्कृतिक उपलब्धियाँ |
केंद्रीय सत्ता से सहयोग/प्रतिरोध |
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बप्पा रावल (कालभोज) |
734 ई. में चित्तौड़ अधिकार |
चित्तौड़ पर अधिकार; राजधानी नागदा |
एकलिंगजी (लकुलीश) मंदिर निर्माण; सोने का सिक्का 115 ग्रेन |
प्रतिरोध: अरब आक्रमणकारियों से संघर्ष |
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खुम्माण प्रथम |
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अरब आक्रमणकारियों को परास्त किया |
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प्रतिरोध: अरबों को पराजित किया |
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खुम्माण तृतीय |
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अंग, कलिंग, सौराष्ट्र, तेलंग, द्रविड़, गौड़ का विजेता |
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विजय अभियान |
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अल्लट |
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आहड़ में वराह मंदिर निर्माण; हूण कन्या हरियादेवी से विवाह |
सहयोग/वैवाहिक संबंध |
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जैत्रसिंह |
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राजधानी चित्तौड़; आहड़, वागड़, कोटड़ा मिलाए |
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प्रतिरोध: 1227 में इल्तुतमिश को हराया; 1248 में नसीरुद्दीन महमूद को हराया |
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तेजसिंह |
1250-73 |
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पत्नी जेतलदेवी ने चित्तौड़गढ़ में श्याम पार्श्वनाथ मंदिर निर्माण; राजस्थान का प्रथम ताड़पत्र ग्रन्थ 'श्रावक प्रतिक्रमण सूत्र चूर्णि' |
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रावल रतनसिंह |
1302-03 |
अलाउद्दीन खलजी का आक्रमण |
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प्रतिरोध: अलाउद्दीन खलजी से युद्ध; 26 अगस्त 1303 को पद्मिनी ने 1600 क्षत्राणियों के साथ जौहर (चित्तौड़ का पहला साका) |
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राणा हम्मीर |
1326 ई. |
चित्तौड़ पर अधिकार, गुहिल वंश पुनर्स्थापित; 'सिसोदिया वंश' आरंभ |
अन्नपूर्णा माता मंदिर बनवाया |
प्रतिरोध: सिंगोली (बाँसवाड़ा) में मुहम्मद बिन तुगलक को हराया; 'मेवाड़ का उद्धारक', 'विषमघाटी पंचानन' |
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लाखा |
1382-1421 |
जावर की चाँदी की खान खोजी |
पिछौला झील (छीतर बंजारे ने) |
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मोकल |
1421-33 |
1428 में रामपुरा युद्ध में नागौर के फिरोज खाँ को हराया |
द्वारिकानाथ मंदिर (मोकल का मंदिर/समिद्धेश्वर) निर्माण |
प्रतिरोध: फिरोज खाँ को पराजित किया |
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कुम्भा |
1433-68 |
सारंगपुर, नागौर, गागरोन, नरायना, अजयमेरु, मण्डोर, माण्डलगढ़, बूँदी, आबू पर अधिकार; 1437 सारंगपुर युद्ध में महमूद खिलजी प्रथम को बंदी; 32 दुर्ग अधिकार |
कीर्ति स्तम्भ (1440-48) - मूर्तिकला संग्रहालय/विश्वकोष; कुम्भलगढ़ दुर्ग (शिल्पी मण्डन); मंदिर - कुम्भस्वामी, श्रृंगारचौरी (जैन), रणकपुर; संगीतराज, संगीत मीमांसा, सूड प्रबन्ध, 'नृत्यरत्नकोष', 'कामराज रतिसार' रचना; विद्वानों का आश्रय (सोम सुंदर, मुनिसुंदर, जयचंद सूरि, आदि) |
प्रतिरोध: 1443 में महमूद का कुम्भलगढ़ आक्रमण असफल; 1457-58 में गुजरात-मालवा का संयुक्त आक्रमण असफल; उपाधियाँ: हालगुरु (पहाड़ी दुर्ग विजेता), छापगुरु (छापामार), हिन्दू सुरताण |
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रायमल |
1473-1509 |
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चित्तौड़ में अद्भूतजी मंदिर; पत्नी श्रृंगारदेवी - घोसूण्डी की बावड़ी |
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महाराणा सांगा (हिन्दूपत) |
1509-28 |
1520 में गुजरात सेना परास्त; 1519 गागरोन युद्ध (महमूद खिलजी-द्वितीय); 1517 खातौली, 1518 धौलपुर/बारी में इब्राहिम लोदी को हराया |
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प्रतिरोध: 17 मार्च 1527 - खानवा युद्ध (बाबर से पराजय - तोपखाना व तुलुगमा); 1 लाख सवार, 7 राजा, 9 राव, 104 सरदार; शरीर पर 80 घाव; टॉड - 'सैनिक का भग्नावशेष' |
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विक्रमादित्य |
1531-36 |
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प्रतिरोध: 1534 में गुजरात बहादुरशाह का आक्रमण; चित्तौड़ का 'दूसरा साका' - कर्मावती ने 1300 महिलाओं के साथ जौहर |
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उदयसिंह |
1537-72 |
1537 में मालदेव के सहयोग से राज्याभिषेक; 1559 - उदयपुर बसाया |
उदयसागर झील; मोती मगरी के महल |
सहयोग/प्रतिरोध: 1544 में शेरशाह को किले की कुंजियाँ भिजवाईं (आक्रमण नहीं); प्रतिरोध: अक्टूबर 1567 - अकबर का आक्रमण - किले का भार जयमल और फत्ता को |
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महाराणा प्रताप (कीका) |
1540-97 |
राज्याभिषेक 1572 गोगुन्दा; केन्द्र कुम्भलगढ़; 18 जून 1576 - हल्दीघाटी युद्ध; अक्टूबर 1576 - चावण्ड राजधानी; जुलाई 1582 - 'दिवेर का युद्ध' - 'मेवाड़ का मैराथन'; 1585-97 - चित्तौड़ एवं माण्डलगढ़ को छोड़कर शेष राज्य पुनः अधिकार |
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प्रतिरोध: अकबर ने 4 शिष्टमण्डल (जलाल खाँ, मानसिंह, भगवानदास, टोडरमल) भेजे; हल्दीघाटी - बदायूँनी ('मुन्तखब उत् तवारीख') में वर्णन; 'चेतक' घोड़ा प्रसिद्ध; झाला बीदा ने मुकुट धारण किया; टॉड - अरावली की तुलना आल्पस से - "हर घाटी प्रताप के वीर कार्य या कीर्तियुक्त पराजय से पवित्र"; हल्दीघाटी = 'मेवाड़ की थर्मोपल्ली' |
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अमरसिंह |
1597-1620 |
युवराज काल में दिवेर युद्ध (1582) में मुगल सेना को हराया |
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प्रतिरोध: जहाँगीर ने अभियान भेजे - सलीम (1599), परवेज-आसफ खाँ (1605), महावत खाँ (1608), अब्दुल्ला (1609), शाहजादा खुर्रम (1613); 5 फरवरी 1615 - मेवाड़-मुगल संधि - महाराणा को दरबार से छूट, पर युवराज मुगल दरबार में; चित्तौड़ वापस मगर मरम्मत नहीं |
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कर्णसिंह |
1620-28 |
राज्य को परगनों में बाँटा; पटेल, पटवारी, चौधरी नियुक्त |
कर्ण विलास, दिलखुश महल, बड़ा दरीखाना (मुगल प्रभाव) |
सहयोग: 1623 - खुर्रम (शाहजहाँ) को पिछोला झील के महलों में पनाह |
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जगतसिंह |
1628-52 |
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पिछौला झील में 'जगनिवास' महल; उदयपुर में जगदीश/जगन्नाथराय मंदिर - 'जगन्नाथराय प्रस्तुति' (कृष्णभट्ट रचयिता, भाण वास्तुकार, नागर शैली की पंचायतन शैली) |
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राजसिंह |
1652-80 |
1658 - उत्तराधिकार युद्ध में टोडा, मालपुरा, टोंक, चाकसू, लालसोट लूटे; 1660 - किशनगढ़ राजकुमारी चारुमति से विवाह; मुगल-मारवाड़ संघर्ष में मारवाड़ का साथ |
राजसमंद झील - गोमती नदी का पानी रोककर; 'राजप्रशस्ति' (रणछोड़ भट्ट, 25 काले संगमरमर की शिलाएँ - विश्व का सबसे बड़ा शिलालेख); 1669-70 - 'श्रीनाथ जी' (नाथद्वारा 1671) व 'द्वारिकाधीश' (काँकरोली) मूर्तियाँ लाए |
प्रतिरोध: शाहजहाँ ने सादुल्ला खाँ को 30,000 सेना भेजी; 'हाड़ी रानी' - सलह कँवर ने अपना सिर काट भेजा; उपाधि 'विजय कटकातु' |
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जयसिंह |
1680-98 |
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सहयोग: 24 जून 1681 - औरंगजेब से संधि - जजिया के बदले पुर, माण्डल, बदनौर सौंपे |
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अमरसिंह द्वितीय |
1698-1710 |
1709 - सौंपे परगने 1 लाख रुपये वार्षिक देकर पुनः प्राप्त; 1708 - पुत्री चन्द्रकुँवरी का विवाह जयपुर के सवाई जयसिंह से - शर्त - मेवाड़ राजकुमारी से पुत्र ही जयपुर का वारिस; जागीरों का विभाजन - सोलह (प्रथम) व बत्तीस (द्वितीय) श्रेणी |
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सहयोग/वैवाहिक संबंध |
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संग्राम सिंह द्वितीय |
1710-34 |
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'कलीला दमना' चित्र; सहेलियों की बाड़ी, सिसारमा में वैद्यनाथ मंदिर |
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जगतसिंह द्वितीय (अध्यक्ष) |
17 जुलाई 1734 |
'हुरड़ा (भीलवाड़ा) सम्मेलन' |
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प्रतिरोध (सामूहिक): मराठों के विरुद्ध राजपूत राजाओं का सम्मेलन |
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भीमसिंह |
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13 जनवरी 1818 - अंग्रेजों से संधि |
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सहयोग (अधीनता): फरवरी 1818 - कर्नल टॉड प्रथम अंग्रेज एजेन्ट |
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स्वरूपसिंह |
1842-61 |
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'स्वरूपशाही सिक्के' - एक ओर 'चित्रकूट उदयपुर', दूसरी 'दोस्ती लंधन'; 15 अगस्त 1861 - सती प्रथा पर रोक |
सहयोग: अंग्रेजों के साथ सहयोग |
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सज्जन सिंह |
1874-84 |
20 अगस्त 1880 - 'महेन्द्रराज सभा'; 1881 - मेवाड़ में जनगणना शुरू |
'सज्जन यन्त्रालय' - 'सज्जन कीर्ति सुधाकर' साप्ताहिक; 2 जुलाई 1877 - 'देश हितैषणी सभा' |
सहयोग: आधुनिकीकरण के प्रयास |
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फतहसिंह |
1884-1921 |
देवाली के नए बाँध की नींव - 'फतहसागर' (पहले 'केनॉट बाँध') |
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प्रतिरोध: 1903 के दिल्ली दरबार - केसरीसिंह बारहठ के 'चेतावणी रा चूंगट्याँ' पढ़कर बिना शामिल हुए लौटे |
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भूपाल सिंह |
1930-48 |
सिसोदिया वंश का अन्तिम शासक |
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सहयोग: भारतीय संघ में विलय |
2. राठौड़ वंश (मारवाड़)
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शासक |
समय/तिथि |
राजनीतिक उपलब्धियाँ |
सांस्कृतिक उपलब्धियाँ |
केंद्रीय सत्ता से सहयोग/प्रतिरोध |
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राव धूहड़ |
1291-1309 |
प्रतिहारों को परास्त कर मण्डोर पर अधिकार |
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विस्तारवादी नीति |
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राव जोधा |
1438-89 |
1459 - जोधपुर बसाया; मेहरानगढ़ (मयूरध्वज/गढ़ चिन्तामणि) दुर्ग |
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स्वतंत्र शासन |
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राव सातल |
1489-92 |
विजय के उपलक्ष - 'घुड़ला उत्सव' शुरू |
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राव मालदेव |
1532-62 |
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प्रतिरोध: जनवरी 1544 - सुमेल का युद्ध; शेरशाह - "एक मुट्ठी बाजरे के लिए मैं हिन्दुस्तान की बादशाहत खो देता"; अबुल फजल - 'हशमत वाला राजा' |
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राव चन्द्रसेन |
1562-81 |
किलों के स्थान पर पहाड़-जंगल प्राथमिकता |
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प्रतिरोध: तुलना - विश्वेश्वरनाथ रेऊ ने महाराणा प्रताप से; मुगलों से संघर्ष |
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मोटा राजा उदयसिंह |
1583-95 |
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सहयोग: मुगलों से वैवाहिक सम्बन्ध स्थापित करने वाला पहला - पुत्री मानमती/जोधाबाई का विवाह जहाँगीर से |
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राव सूरसिंह |
1595-1619 |
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सहयोग: अकबर ने 'सवाई राजा' की उपाधि |
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महाराजा जसवंतसिंह प्रथम |
1638-78 |
5 जनवरी 1659 - खजुवा में शाही डेरे को लूटकर जोधपुर रवाना |
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सहयोग/प्रतिरोध: मुगल सेवा में रहे; 28 नवम्बर 1678 - मृत्यु जमरूद (काबुल) |
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महाराजा अजीत सिंह |
1679-1724 |
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प्रतिरोध: औरंगजेब से संघर्ष; छोटे पुत्र बख्त सिंह ने हत्या |
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महाराजा विजयसिंह |
1752-93 |
शाहआलम द्वितीय से टकसाल अनुमति |
'विजयशाही सिक्के' |
सहयोग: मुगलों से अनुमति |
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महाराजा मानसिंह |
1804-43 |
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प्रतिरोध: कृष्णाकुमारी विवाद; 13 मार्च 1807 - गिंगोली का युद्ध; 6 जनवरी 1818 - अंग्रेजों से संधि (अधीनता) |
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तखतसिंह |
1843-73 |
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सहयोग: 1857 क्रांति में अंग्रेजों की सहायता |
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महाराजा सरदार सिंह |
1895-1911 |
जोधपुर - 'पोलो का घर' |
जसवंत थड़ा ('राजस्थान का ताजमहल') निर्माण |
सहयोग: अंग्रेजों के साथ सहयोग |
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हनुवंत सिंह |
1947-49 |
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सहयोग: 9 अगस्त 1947 - भारतीय संघ अधिमिलन पत्र पर हस्ताक्षर |
3. राठौड़ की शाखाएँ - बीकानेर एवं किशनगढ़
बीकानेर
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शासक |
समय/तिथि |
राजनीतिक उपलब्धियाँ |
सांस्कृतिक उपलब्धियाँ |
केंद्रीय सत्ता से सहयोग/प्रतिरोध |
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राव बीका |
1488 |
बीकानेर स्थापना |
देशनोक में करणीमाता का मूल मंदिर |
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राव जैतसी |
1526-42 |
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प्रतिरोध: 1534 - कामरान (हुमायूँ का भाई) को हराया |
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राव कल्याणमल |
1542-74 |
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सहयोग: मुगल अधीनता स्वीकार करने वाला मारवाड़ का पहला राठौड़ शासक |
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महाराजा रायसिंह |
1574-1612 |
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1589-94 - जूनागढ़ दुर्ग; मुंशी देवीप्रसाद - 'राजपूताने के कर्ण' |
सहयोग: मुगल सेवा |
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महाराजा कर्णसिंह |
1631-69 |
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चिन्तामणि भट्ट - 'जंगलधर बादशाह' |
सहयोग: मुगल सेवा |
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महाराजा अनूप सिंह |
1669-98 |
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बीकानेर चित्रकला शैली का 'स्वर्णकाल' |
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महाराजा गंगासिंह |
1887-1943 |
चीन बॉक्सर विद्रोह - 'गंगा रिसाला' (ऊँट सेना) - 'चीन युद्ध मेडल'; गंगनहर लाकर गंगानगर बसाना - सबसे प्रशंसनीय कार्य |
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सहयोग: ब्रिटिश सेना में गंगा रिसाला |
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शार्दूलसिंह (अन्तिम) |
1943-49 |
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सहयोग: सर्वप्रथम भारतीय संघ अधिमिलन पत्र पर हस्ताक्षर |
किशनगढ़
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शासक |
समय/तिथि |
राजनीतिक उपलब्धियाँ |
सांस्कृतिक उपलब्धियाँ |
केंद्रीय सत्ता से सहयोग/प्रतिरोध |
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किशनसिंह (संस्थापक) |
1609 |
मोटाराजा उदयसिंह के आठवें पुत्र |
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महाराजा रूपसिंह |
1643-58 |
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रूपन नदी के तट पर रूपनगढ़ दुर्ग |
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महाराजा सावन्तसिंह |
1748-64 |
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प्रेयसी विष्णुप्रिया (बणी-ठणी) - निहालचन्द ने चित्र - 'भारतीय मोनालिसा', 'किशनगढ़ की राधा'; सावन्तसिंह - 'नागरीदास', बणी-ठणी - 'रसिक बिहारी' कविता |
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महाराजा कल्याणसिंह |
1798-1838 |
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सहयोग (अधीनता): 1818 - अंग्रेजों से संधि |
4. कच्छवाहा वंश (आमेर-जयपुर)
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शासक |
समय/तिथि |
राजनीतिक उपलब्धियाँ |
सांस्कृतिक उपलब्धियाँ |
केंद्रीय सत्ता से सहयोग/प्रतिरोध |
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दुलहराय |
1137 ई. |
चौहानों के सामंत; बड़गूजरों को परास्त - ढूंढाड़ में नवीन राज्य; जमवारामगढ़ - राजधानी |
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काकिलदेव |
1207 वि.सं. |
मीणों को परास्त - आमेर को राजधानी; यादवों से मेड़ व बैराठ जीते |
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पृथ्वीराज कच्छवाहा |
1527 ई. |
चन्द्रसेन का उत्तराधिकारी |
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प्रतिरोध: खानवा युद्ध - महाराणा सांगा की ओर से वीरगति |
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भारमल |
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सहयोग: मुगल अधीनता स्वीकार करने वाला पहला राजपूत शासक; मुगलों से वैवाहिक संबंध स्थापित करने वाला पहला; जनवरी 1562 - पुत्री हरकुबाई/शाहीबाई/मानमति का विवाह अकबर से; अकबर - 5000 मनसब, 'अमीर उल उमरा', 'राजा' उपाधि |
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भगवंतदास |
1574-1589 |
1583-1589 - पंजाब सूबेदार |
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सहयोग: अकबर - 5000 मनसब, 'अमीर उल उमरा'; 1585 - पुत्री मानबाई का विवाह जहाँगीर से |
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मानसिंह |
1589-1614 |
अकबर के नवरत्न; उपाधि 'फर्जन्द' (बेटा), 7000 मनसब; सूबेदार - काबुल, बंगाल, बिहार; 1592 - उड़ीसा जीत - पहली बार मुगल साम्राज्य अंग; बिहार - मानपुर; बंगाल - अकबरपुर/राजमहल |
रोहतासगढ़ महल; बंगाल से शिलादेवी मूर्ति आमेर में प्रतिष्ठित; जगत शिरोमणि मंदिर (माता कंकावती ने पुत्र जगतसिंह की स्मृति में) |
सहयोग/प्रतिरोध: 1573 - महाराणा प्रताप के पास संधि का दूसरा प्रस्ताव; 1576 - हल्दीघाटी युद्ध का नेतृत्व (मुगल सेना) |
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मिर्जा राजा जयसिंह |
1621-1667 |
तीन मुगल सम्राट - जहाँगीर, शाहजहाँ, औरंगजेब; सैन्य अभियान - 1623 मलिक अम्बर, 1629 उजबेग, 1630 खानेजहाँ लोदी, 1636 बीजापुर-गोलकुण्डा; 1658 - उत्तराधिकार युद्ध में शुजा के विरुद्ध; औरंगजेब का पक्ष |
आमेर महल, जयगढ़ किला, औरंगाबाद में जयसिंहपुरा; कवि बिहारी का आश्रयदाता - एक-एक दोहे पर एक-एक स्वर्ण मुद्रा |
सहयोग: 1637 - शाहजहाँ ने 'मिर्जाराजा' पदवी; मनसब 7000 जात व सवार; 1665 - पुरंदर की संधि - शिवाजी ने मुगल अधीनता स्वीकार - 23 किले सुपुर्द; जदुनाथ सरकार - "एलिजाबेथ के दरबार के वॉल सिंघम की भाँति... काम लेने में कठोर और मूल्यांकन में कृतघ्न" |
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सवाई जयसिंह |
1700-1743 |
7 मुगल शासकों की सेवा; 1707 - उत्तराधिकार युद्ध में आज़म का पक्ष; 1708 - मेवाड़ राजकुमारी चन्द्रकुँवरी से विवाह - शर्त - जयपुर को उत्तराधिकार युद्ध; मालवा सूबेदारी (1713, 1729, 1732); 17 जुलाई 1734 - 'हुरड़ा सम्मेलन' - मराठों का मुकाबला; 1729 - बूँदी हस्तक्षेप |
ज्योतिष: 'जीज मोहम्मदशाही' - नक्षत्रों की शुद्ध सारणी; 'जयसिंह कारिका' - ज्योतिष ग्रंथ; जयपुर, दिल्ली, मथुरा, उज्जैन, बनारस - वेधशालाएँ; जंतर-मंतर (जयपुर) - सबसे बड़ी; जुलाई 2010 - यूनेस्को विश्व धरोहर; 1727 - जयपुर नगर - विद्याधर (बंगाली वास्तुशास्त्री) - आयताकार खण्ड नक्शा; वाजपेय, राजसूय, पुरुषमेध, अश्वमेध यज्ञ - अंतिम हिन्दू नरेश (डॉ. गोपीनाथ शर्मा - यूप स्तम्भ प्रतिष्ठा); 1714 - गोविन्द देवजी मूर्ति वृन्दावन से लाकर आमेर में स्थापित - राजस्थान में गौडीय संप्रदाय की पहली पीठ; नाहरगढ़/सुदर्शनगढ़ (1734), जयबाण तोप (एशिया की सबसे बड़ी), चन्द्रमहल, जलमहल |
सहयोग/प्रतिरोध: औरंगजेब ने 'सवाई' उपाधि - जयसिंह प्रथम से बढ़कर (सवाया); 1732 - मराठों से पराजित - संधि; मराठों-मुगलों में मध्यस्थता |
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सवाई ईश्वरीसिंह |
1743-1750 |
सौतेले भाई माधोसिंह से संघर्ष; राजमहल युद्ध (1747) - विजय |
'ईसरलाट' (सरगासूली) - 7 मंजिला - चित्तौड़ विजय स्तम्भ से प्रेरित |
प्रतिरोध: बगरू युद्ध (1748) - माधोसिंह ने मराठों की सहायता से विजय; 1750 - आत्महत्या |
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सवाई माधोसिंह प्रथम |
1750-1768 |
1751 - जयपुर में मराठों का कत्लेआम; 1761 - भटवाड़ा (बारां) युद्ध - कोटा से परास्त; 1763 - सवाई माधोपुर स्थापना; काँमो युद्ध - भरतपुर जवाहरसिंह परास्त; रणथम्भौर दुर्ग मुगलों से छीन |
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प्रतिरोध: मराठों के विरुद्ध; मुगलों से रणथम्भौर छीना |
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सवाई प्रतापसिंह |
1778-1803 |
1787 - तूंगा (लालसोट) युद्ध - महादजी सिंधिया पीछे हटा; 1790 - पाटन युद्ध - मराठों से पराजित |
हवामहल (1799) - 5 मंजिला, 953 खिड़कियाँ, भगवान विष्णु समर्पित, वास्तुकार उस्ताद लालचन्द्र; 'ब्रजनिधि' उपनाम से कविता - 'ब्रजनिधि ग्रंथावली'; संगीत सम्मेलन; 'राधा गोविन्द संगीत सार'; दरबार में 22 विद्वान - प्रताप बाईसी/गंधर्व बाईसी |
सहयोग/प्रतिरोध: सिंधिया-होल्कर से अच्छे संबंध |
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सवाई जगतसिंह |
1803-1818 |
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प्रतिरोध: कृष्णा विवाद - गिंगोली (नागौर) युद्ध (13 मार्च, 1807) - मारवाड़ मानसिंह परास्त; 15 अप्रैल, 1818 - अंग्रेजों से संधि (अधीनता) |
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सवाई रामसिंह द्वितीय |
1835-1880 |
1857 - अंग्रेजों का तन-मन-धन से सहयोग |
'पोथीखाना'; अलबर्ट हॉल संग्रहालय (1876) - राजस्थान का प्रथम संग्रहालय; रामप्रकाश थियेटर, रामनिवास बाग, रामगढ़ बाँध, महाराजा स्कूल, संस्कृत स्कूल; लुडलो ने समाधि प्रथा और कन्या क्रय-विक्रय पर राजस्थान में सर्वप्रथम जयपुर में प्रतिबंध |
सहयोग: 'सितार-ए-हिन्द' उपाधि; 1876 - प्रिंस ऑफ वेल्स के आगमन - जयपुर गुलाबी रंग |
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सवाई माधोसिंह द्वितीय |
1880-1922 |
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राजस्थान में सर्वप्रथम 1904 - डाक टिकिट व पोस्टकार्ड - जयपुर; बनारस हिन्दू विश्वविद्यालय - मदनमोहन मालवीय को 5 लाख अनुदान; मुबारक महल - मुगल-राजपूत-यूरोपियन स्थापत्य; एडवर्ड सप्तम राज्याभिषेक - चाँदी के दो बड़े कलश - दुनिया के सबसे बड़े चाँदी के पात्र; नाहरगढ़ - 9 पासवानों के लिए 9 एक जैसे महल |
सहयोग: अंग्रेजों के साथ सहयोग |
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सवाई मानसिंह द्वितीय (अन्तिम) |
1922-1949 |
1949-1956 - राजस्थान राजप्रमुख; प्रधानमंत्री मिर्जा इस्माइल - आधुनिक जयपुर का निर्माता |
पोलो का प्रसिद्ध खिलाड़ी |
सहयोग: भारतीय संघ में विलय |
5. चौहान वंश (सांभर/शाकम्भरी)
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शासक |
समय/तिथि |
राजनीतिक उपलब्धियाँ |
सांस्कृतिक उपलब्धियाँ |
केंद्रीय सत्ता से सहयोग/प्रतिरोध |
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वासुदेव (मूलपुरुष) |
~551 ई. |
साँभर झील के आसपास राज्य; राजधानी अहिछत्रपुर (नागौर) |
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वाक्पतिराज |
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प्रतिहारों को परास्त कर शक्ति का परिचय |
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सिंहराज |
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तोमरों व प्रतिहारों को परास्त किया |
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विग्रहराज द्वितीय |
973 ई. (हर्षनाथ लेख) |
गुजरात के चालुक्य शासक मूलराज को परास्त किया |
हर्षनाथ लेख में विजयों का उल्लेख |
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गोविन्द तृतीय |
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उपाधि 'वैरीघट्ट' (शत्रुसंहारक) - 'पृथ्वीराज विजय' में |
प्रतिरोध: फरिश्ता के अनुसार गजनी के शासक को मारवाड़ में आगे बढ़ने से रोका |
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वाक्पतिराज द्वितीय |
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मेवाड़ के शासक अम्बाप्रसाद को परास्त किया |
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अजयराज |
1105-1133 ई. |
मुस्लिम सेना को परास्त किया; 1113 ई. में 'अजय मेरु' (अजमेर) नगर बसाया |
चाँदी एवं ताँबे के 'अजयप्रिय द्रम्म' सिक्के; सिक्कों पर पत्नी सोमलदेवी का नाम; दिगम्बर-श्वेताम्बर शास्त्रार्थ की अध्यक्षता; पार्श्वनाथ मंदिर को स्वर्ण कलश प्रदान |
प्रतिरोध: मुस्लिम सेना को परास्त |
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अर्णोराज |
1133-1155 ई. |
तुर्कों एवं मालवा को परास्त किया; गुजरात के कुमारपाल चालुक्य से परास्त |
आनासागर झील (अजमेर) एवं 'वराह मंदिर' (पुष्कर) निर्माण |
प्रतिरोध: तुर्कों एवं मालवा को परास्त |
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विग्रहराज चतुर्थ |
1158-1163 ई. |
दिल्ली पर अधिकार करने वाला पहला चौहान शासक - तोमरों को पराजित; गजनी के खुशरूशाह को परास्त |
उपाधि 'कवि बान्धव' (ज्यानक भट्ठ द्वारा); 'हरकेलि' नाटक की रचना (स्वयं); दरबारी विद्वान सोमदेव ने 'ललित विग्रहराज' नाटक लिखा; अजमेर में संस्कृत पाठशाला (बाद में कुतुबुद्दीन ऐबक ने तुड़वाकर 'ढाई दिन का झोंपड़ा' मस्जिद बनवाई); बीसलपुर नगर बसाकर बीसलपुर झील बनवाई; नरपति नाल्हे ने 'बीसलदेव रासो' रचा |
प्रतिरोध: दिल्ली पर अधिकार; गजनी के खुशरूशाह को परास्त |
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सोमेश्वर |
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कोंकण के मल्लिकार्जुन को परास्त; कलचूरि राजकुमारी कर्पूरदेवी से विवाह |
अपने पिता व स्वयं की मूर्ति बनाकर नवीन मूर्तिकला प्रोत्साहन |
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पृथ्वीराज तृतीय |
1177-1192 ई. |
11 वर्ष की आयु में शासक; 1182 - भण्डानकों व आल्हा-ऊदल को परास्त; महोबा के चन्देल शासक परमार्दिदेव को पराजित; जयचन्द को परास्त; स्वयंवर में संयोगिता का अपहरण कर विवाह; चालुक्य, चौहान एवं गहड़वालों को हराया; 1191 - तराईन का प्रथम युद्ध - गौरी को बहुत अधिक हानि |
दरबारी विद्वान - जयानक ('पृथ्वीराज विजय'), चन्द्रबरदाई ('पृथ्वीराज रासो'); दिल्ली में 'पिथौरागढ़' किले का निर्माण |
प्रतिरोध: मुहम्मद गौरी को कई बार परास्त; 1192 - तराईन का द्वितीय युद्ध - मुहम्मद गौरी से पराजित - चौहान राज्य का पतन, भारत में तुर्की शासन की नींव; सबसे बड़ी भूल - 1191 में तुर्कों की शक्ति को पूरी तरह नष्ट न करना |
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हरिराज |
1194 ई. |
पृथ्वीराज के भाई |
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प्रतिरोध: ऐबक के अजमेर दुर्ग घेरने पर चिता में जलकर इहलीला समाप्त |
6. रणथम्भौर का चौहान वंश
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शासक |
समय/तिथि |
राजनीतिक उपलब्धियाँ |
सांस्कृतिक उपलब्धियाँ |
केंद्रीय सत्ता से सहयोग/प्रतिरोध |
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गोविन्दराज (संस्थापक) |
1194 ई. |
पृथ्वीराज तृतीय का पुत्र |
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वीर नारायण |
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प्रतिरोध: इल्तुतमिश के आक्रमण का सामना |
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जैत्रसिंह |
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प्रतिरोध: सुल्तान नासीरुद्दीन के आक्रमण को असफल किया |
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हम्मीर |
1282-1301 ई. |
दिग्विजय नीति; आबू, काठियावाड़, पुष्कर, चम्पा, धार को अधीन; मेवाड़ के समरसिंह को परास्त |
32 खम्भों की छतरी (पिता जैत्रसिंह के 32 वर्ष शासन की स्मृति); कवि अमीर खुसरो ('खजाइन-उल-फुतूह') में उल्लेख |
प्रतिरोध: 1291 - जलालुद्दीन खलजी का आक्रमण असफल; 1299 - अलाउद्दीन खलजी का प्रथम आक्रमण - नुसरत खाँ मारा गया; 1301 - अलाउद्दीन का आक्रमण - रणमल व रतिपाल ने विश्वासघात; हम्मीर लड़ता हुआ मारा गया; रानी रंगादेवी के नेतृत्व में जौहर - राजस्थान का पहला जौहर/साका; 16 युद्धों का विजेता, 17वें युद्ध में मारा गया |
7. जालौर का चौहान वंश (सोनगरा चौहान)
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शासक |
समय/तिथि |
राजनीतिक उपलब्धियाँ |
सांस्कृतिक उपलब्धियाँ |
केंद्रीय सत्ता से सहयोग/प्रतिरोध |
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कीर्तिपाल (संस्थापक) |
1181 ई. |
बिजौलिया प्रशस्ति में जालौर = 'जाबालिपुर'; किला = सुवर्णगिरी, सोनगढ़, कांचन गिरी |
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उदयसिंह |
1205-1257 ई. |
इल्तुतमिश के आधिपत्य वाले मण्डोर और नाडौल हस्तगत; गुजरात के लवण प्रसाद परास्त; गोडवाड़ व मेवाड़ के कुछ भागों पर आधिपत्य |
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कान्हड़देव |
1305-1311 ई. |
सर्वाधिक शक्तिशाली |
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प्रतिरोध: अलाउद्दीन खलजी से विरोध; 1305 - ऐन-उल-मुल्क मुल्तानी ने समझाकर दिल्ली ले गया; नैणसी के अनुसार - पुत्र वीरमदेव ने सुल्तान की पुत्री फिरोजा से विवाह करने से इनकार; 1308 - सुल्तान ने सिवाना किला जीता - नाम 'खैराबाद'; 1311 - जालौर पर घेरा - दहिया सिरदार बीका के विश्वासघात से किला गिरा; कान्हड़देव लड़ता हुआ मारा गया; महिलाओं ने जौहर किया; अलाउद्दीन ने नाम 'जलालाबाद'; अलाई/तोपखाने की मस्जिद निर्माण |
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अखयराज |
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पद्मनाभ ने 'कान्हड़दे प्रबंध' रचा |
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8. सिरोही का चौहान वंश (देवड़ा चौहान)
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शासक |
समय/तिथि |
राजनीतिक उपलब्धियाँ |
सांस्कृतिक उपलब्धियाँ |
केंद्रीय सत्ता से सहयोग/प्रतिरोध |
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राव लुम्बा (संस्थापक) |
~1311 ई. |
परमारों से आबू व चन्द्रावती छीनकर राज्य स्थापित; राजधानी चन्द्रावती |
1320 ई. आबू अचलेश्वर मंदिर शिलालेख; अचलेश्वर मंदिर का जीर्णोद्धार; अपनी व रानी की मूर्तियाँ स्थापित |
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महाराज शिवभाण |
1405 ई. |
शिवपुरी (पुरानी सिरोही) बसाया; पहाड़ी पर दुर्ग |
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सहस्रमल (सैंसमल) |
1425 ई. |
वर्तमान सिरोही नगर बसाया; राजधानी स्थानांतरित |
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प्रतिरोध: महाराणा कुम्भा ने आक्रमण - आबू व बसंतगढ़ अधिकार; कुम्भा ने अचलगढ़ किला (1452) व कुम्भस्वामी मंदिर निर्माण |
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महाराव लाखा |
1451-1483 |
1457 - गुजरात सेना ने कुम्भलगढ़ आक्रमण - मेवाड़ सेना जाने पर आबू पुनः अधिकार |
पावागढ़ से कालिका मूर्ति - कालिका माता मंदिर; लाखेलाव तालाब |
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महाराव अखयराज |
1523-1533 |
'उड़णा अखा' नाम से प्रसिद्ध |
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सहयोग: खानवा युद्ध (1527) में सांगा का साथ |
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महाराव सुरताण |
1571-1610 |
बीजा देवड़ा शक्तिशाली - सुरताण को सिरोही छोड़ना पड़ा; दताणी युद्ध (1583) - जगमाल मारा गया, सुरताण का सम्पूर्ण सिरोही पर अधिकार |
दुरसा आढ़ो घायल - सुरताण ने आश्रय दिया |
प्रतिरोध: मेवाड़ महाराणा प्रताप ने देवड़ा कल्ला को गद्दी पर बिठाया; 1593 - अकबर ने मोटा राजा उदयसिंह भेजा, सुरताण पकड़ा नहीं गया; 'अकबरनामा' में अबुल फजल द्वारा उल्लेख |
|
अखयराज द्वितीय |
1620-1673 |
पिता के हत्यारों से बदला; 1628 - मेवाड़ आक्रमण; महाराणा राजसिंह से अच्छे सम्बन्ध |
रानी रतनकंवर - रतन बावड़ी; महेशदास (दुरसा आढ़ा का वंशज) कृपापात्र |
सहयोग: मेवाड़ के साथ |
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वैरीशाल |
1676-1697 |
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प्रतिरोध: महाराजा जसवंतसिंह के पुत्र अजीतसिंह को औरंगजेब से छिपाकर कालिन्दी गाँव में रखा |
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शिवसिंह |
1817-1862 |
1817 - अव्यवस्था पर छोटे भाई शिवसिंह ने नजरबंद कर शासन संभाला |
1853 - 'शिवगंज' कस्बा बसाया |
सहयोग (अधीनता): 11 सितम्बर, 1823 - ईस्ट इण्डिया कम्पनी से संधि (कर्नल टॉड की जाँच के बाद); 1857 क्रांति में अंग्रेजों का साथ |
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केसरीसिंह |
1875-1925 |
दिल्ली दरबार (1877) में सम्मिलित नहीं; 1 जनवरी, 1889 - 'महाराव' खिताब; 1903 दिल्ली दरबार में भाग |
'कैसरविलास' बाग; नमक समझौता; जीवित समाधि पर रोक; अस्पताल, तालाब, बाग, सड़कें |
प्रतिरोध/सहयोग: 1877 दिल्ली दरबार में नहीं गए; बाद में सहयोग |
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स्वरूपरामसिंह |
1925-1946 |
प्रजामंडल - नागरिक अधिकारों व उत्तरदायी सरकार के लिए आंदोलन; प्रशासनिक परिवर्तन |
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विलय |
26 जनवरी, 1950 |
अधिकांश सिरोही राज्य राजस्थान का हिस्सा |
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सहयोग: भारतीय संघ में विलय |
9. हाड़ौती (बूँदी) का चौहान वंश
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शासक |
समय/तिथि |
राजनीतिक उपलब्धियाँ |
सांस्कृतिक उपलब्धियाँ |
केंद्रीय सत्ता से सहयोग/प्रतिरोध |
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देवा हाड़ा (संस्थापक) |
1241 ई. |
बम्बावदे के सामंत चौहान; मीणाओं को पराजित - बूँदी राज्य स्थापना |
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समरसिंह हाड़ा |
1264 ई. |
कोटिया शाखा के भीलों को परास्त - कोटा अधिकार |
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बरसिंह हाड़ा |
1354 ई. |
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तारागढ़ किला निर्माण - भित्ति चित्रों के लिए विख्यात |
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राव सुर्जन हाड़ा |
1554-1585 |
मेवाड़ से संबंध विच्छेद - स्वतंत्र सत्ता; रणथम्भौर अधिकार |
द्वारिकापुरी - रणछोड़जी मंदिर |
सहयोग (अधीनता): 1569 - अकबर ने रणथम्भौर घेरा - मुगल अधीनता; उपाधि 'रावराजा', पाँच हजार मनसब; बूँदी के निकट 26 व बनारस के निकट 26 परगने जागीर; बनारस व चुनार सूबेदारी; बनारस - महल, जलाशय, गंगा घाट |
|
राव रतनसिंह |
1607-1631 |
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जहाँगीर - 'रामराज' (न्यायप्रिय), 'सरबुलन्दराय' (चित्रकलाप्रेमी); अपने लड़के गोपीनाथ की हत्या करने वाले ब्राह्मणों को दण्ड नहीं |
सहयोग: जहाँगीर - 5000 मनसब; खुर्रम के विद्रोह दमन में भूमिका |
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राव शत्रुशाल |
1631-1658 |
मुगल उत्तराधिकार युद्ध - दारा के पक्ष |
-- |
प्रतिरोध: सामूगढ़ (1658) में गोली लगने से वीरगति; शाहजहाँ - राव पदवी, 3000 जात व 2000 सवार |
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राव राजा बुद्धसिंह |
1695-1730 |
1707 उत्तराधिकार युद्ध - बहादुरशाह का साथ; 1729 - सवाई जयसिंह से झगड़ा - बुद्धसिंह हटाकर दलेलसिंह गद्दी पर; 1734 - बुद्धसिंह की पत्नी ने होल्कर को राखी - मराठों का राजस्थान प्रवेश |
-- |
सहयोग: बहादुरशाह ने 'महाराव राणा' खिताब, कुछ परगने दिए; फर्रुखसियर ने बूँदी का नाम 'फर्रुखाबाद' |
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राव विष्णुसिंह |
1771-1821 |
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सहयोग (अधीनता): 10 फरवरी, 1818 - अंग्रेजों से संधि - अधीनता स्वीकार |
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बहादुरसिंह |
1945-1948 |
बूँदी का अन्तिम शासक |
-- |
सहयोग: भारतीय संघ में विलय |
10. कोटा का हाड़ा राजवंश
|
शासक |
समय/तिथि |
राजनीतिक उपलब्धियाँ |
सांस्कृतिक उपलब्धियाँ |
केंद्रीय सत्ता से सहयोग/प्रतिरोध |
|
राव माधोसिंह (प्रथम स्वतंत्र शासक) |
1631-1648 |
1631 - शाहजहाँ ने स्वीकार; हाड़ौती का केन्द्र कोटा बना; खानेजहाँ लोदी (1631) व जुझारसिंह बुंदेला (1635) विद्रोह दबाए |
-- |
सहयोग: शाहजहाँ; कंधार व मध्य एशिया अभियान - 'बाद रफ्तार' घोड़ा (शाहजहाँ) |
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राव मुकुन्दसिंह |
1648-1658 |
मालवा, दक्षिण, कंधार अभियान; उत्तराधिकार युद्ध - दारा के पक्ष; जागीरदारों से 'मसादती' कर |
अबलीमीणी की प्रेम कहानी - मुकुन्दरा में महल |
प्रतिरोध: धर्मत में औरंगजेब-मुराद की सेना से लड़ते हुए वीरगति |
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महाराव भीमसिंह |
1707-1720 |
जाजू में आजम का साथ - मुअज्जम ने बूँदी बुद्धसिंह को आक्रमण प्रोत्साहन - बूँदी सेना परास्त; बूँदी राजकोष, धूलधाणी व कड़क बिजली तोप छीनकर लाया; कुरवई (1720) - सैय्यद बंधुओं के पक्ष में निजाम से लड़ते हुए मारा गया |
कृष्ण भक्त - 'कृष्णदास'; कोटा → नंदगाँव, शेरगढ़ → बरसाना; कोटा नगर बृजनाथ जी को अर्पण; आदेशों पर 'जय गोपाल'; भीमविलास, भीमगढ़ किला, ब्रजनाथजी व आशापुराजी मंदिर निर्माण |
सहयोग: फर्रुखसियर - 5000 मनसबदार; कोटा का पहला 'महाराव' |
|
महाराव उम्मेदसिंह |
1770-1819 |
झाला जालिमसिंह की शक्ति चरम; मराठों को धन व कूटनीति से दूर |
-- |
सहयोग (अधीनता): 26 दिसम्बर, 1817 - अंग्रेजों से संधि - अधीनता; जालिमसिंह ने 1818 में अंग्रेजों से गुप्त संधि - प्रशासनिक सत्ता वंशानुगत |
|
महाराव किशोरसिंह |
1819-1828 |
जालिमसिंह से प्रशासनिक शक्तियों को लेकर मतभेद |
-- |
प्रतिरोध: 1 अक्टूबर, 1821 - मांगरोल (बारां) युद्ध - अंग्रेज सहयोग (कर्नल टॉड) जालिमसिंह को - किशोरसिंह परास्त; नाथद्वारा गया - राज्य श्रीनाथजी को समर्पित |
|
महाराव रामसिंह द्वितीय |
1828-1865 |
1837 - अंग्रेजों ने 17 (या 19) परगने अलग - झालावाड़ राज्य; 1857 - जयदयाल व मेहराब खान के साथ जनता ने नजरबंद; मेजर बर्टन की हत्या |
-- |
सहयोग: 1838 - मान्यता; 1857 में सलामी 17 से 13 तोप घटी |
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महाराव भीमसिंह (अन्तिम) |
1940-1948 |
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सहयोग: 25 मार्च, 1948 - कोटा संयुक्त राजस्थान की राजधानी; राजप्रमुख पद |
11. भाटी वंश (जैसलमेर)
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शासक |
समय/तिथि |
राजनीतिक उपलब्धियाँ |
सांस्कृतिक उपलब्धियाँ |
केंद्रीय सत्ता से सहयोग/प्रतिरोध |
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विजयराज |
1176 ई. (धनावा शिलालेख) |
'महाराजा' उपाधि |
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शालिवाहन |
~1187 ई. |
जैसलमेर का निर्माण पूरा |
किला - पीले पत्थर, कहीं चूना नहीं |
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हरराय भाटी |
1570 ई. |
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सहयोग (अधीनता): अकबर के नागौर दरबार - अधीनता; पुत्री का विवाह अकबर से |
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मूलराज द्वितीय |
12 दिसम्बर, 1818 |
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-- |
सहयोग (अधीनता): अंग्रेजों से संधि - अधीनता |
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प्रथम साका |
1308 ई. |
अलाउद्दीन खिलजी के सेनानायक कमालुद्दीन गुर्ग |
-- |
प्रतिरोध: महिलाओं ने जौहर |
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द्वितीय साका |
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मुहम्मद तुगलक |
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प्रतिरोध: रावले दूदा, त्रिलोकसी - वीरगति; महिलाओं ने जौहर |
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तीसरा साका (अर्द्धसाका) |
1550 ई. |
अमीर अली ने राज्यच्युत होकर शरण ली - विश्वासघात; रावल लूणकर्ण वीरगति; भाटी विजयी |
-- |
प्रतिरोध: जौहर नहीं → 'अर्द्धसाका' |
12. जाट वंश (भरतपुर)
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शासक |
समय/तिथि |
राजनीतिक उपलब्धियाँ |
सांस्कृतिक उपलब्धियाँ |
केंद्रीय सत्ता से सहयोग/प्रतिरोध |
|
चूड़ामन (संस्थापक) |
1695-1721 |
मथुरा-आगरा में लूट |
-- |
प्रतिरोध: बहादुरशाह - 1500 जात, 500 सवार, 'राव बहादुर' उपाधि; 1718 - फर्रुखसियर ने जयसिंह भेजा - नहीं दबा सका; 'फतेहसिंह' उपाधि; कानूनगो - "असफल देशभक्त और सफल विद्रोही" |
|
बदन सिंह |
-- |
जयसिंह ने थून किले पर अधिकार - अधीनता; डीग - निवास |
डीग, कुम्हेर, भरतपुर, वैर के दुर्ग; जलमहल, बाग-बगीचे |
सहयोग (अधीनता): 'बृजराज' उपाधि |
|
सूरजमल |
1756-1763 |
भरतपुर - नवीन गढ़ - राजधानी; 1760 - अहमदशाह अब्दाली के विरुद्ध मराठों के पक्ष - सदाशिवराव भाऊ के व्यवहार से खिन्न - लौटा; पानीपत पराजय के बाद मराठों को शरण व सहायता |
'जाटों का प्लेटो (अफलातून)' - शिक्षा व साहित्य प्रेम |
प्रतिरोध/सहयोग: 1763 - रूहेलों के विरुद्ध युद्ध में मृत्यु |
|
रणजीत सिंह |
1775-1805 |
1775 - केसरीसिंह हटाकर शासक |
-- |
प्रतिरोध: सितम्बर, 1803 - लॉर्ड लेक से संधि; अक्टूबर, 1804 - होल्कर का साथ - संधि तोड़; अंग्रेजों ने घेरा - किला नहीं जीत पाए; अप्रैल, 1805 - पुनः संधि |
|
रणधीरसिंह |
1805-1823 |
-- |
-- |
सहयोग: नेपाल युद्ध, पिण्डारी दमन, मराठों के विरुद्ध - अंग्रेजों का साथ |
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बलवन्त सिंह |
1825-1853 |
-- |
-- |
प्रतिरोध: 1826 - अंग्रेजों ने लोहागढ़ किला अधिकार (प्रथम बार) |
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बृजेन्द्रसिंह (अन्तिम) |
1929-1947 |
-- |
-- |
सहयोग: 31 जुलाई, 1947 - अधिमिलन पत्र पर हस्ताक्षर |
13. झाला वंश (झालावाड़)
|
शासक |
समय/तिथि |
राजनीतिक उपलब्धियाँ |
सांस्कृतिक उपलब्धियाँ |
केंद्रीय सत्ता से सहयोग/प्रतिरोध |
|
राज्य स्थापना |
1837 ई. |
अंग्रेजों ने कोटा से 19 (एम.एल. शर्मा) / 17 (वी.के. वशिष्ठ) परगने अलग - झालावाड़ राज्य |
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सहयोग: अप्रैल, 1838 - मान्यता |
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मदनसिंह (प्रथम शासक) |
1838-1845 |
जालिमसिंह का पौत्र |
'राजराणा' उपाधि |
सहयोग (अधीनता): अंग्रेजों से संधि |
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पृथ्वीसिंह |
1845-1875 |
1866 - रेलवे लाइन के लिए मुफ्त भूमि |
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सहयोग: 1857 - अंग्रेज भक्त |
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जालिमसिंह द्वितीय |
1875-1896 |
पॉलिटिकल एजेंट से प्रशासनिक मतभेद - 1896 - सिंहासनाच्युत |
1881 - नमक समझौता |
प्रतिरोध: राज्य छोटा - 1 जनवरी, 1899 - कई परगने कोटा में वापस |
|
भवानीसिंह |
1899-1929 |
1901 - ब्रिटिश कलदार प्रचलन |
1921 - भवानी नाट्यशाला - भारत भर विख्यात |
सहयोग: अंग्रेजों के साथ |
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राजेन्द्रसिंह |
1929-1943 |
'सुधारक' उपनाम |
राजकीय मंदिरों में हरिजनों को प्रवेश |
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|
हरिश्चन्द्र (अन्तिम) |
1943-1948 |
प्रजामण्डल आंदोलन का समर्थन; अक्टूबर 1947 - उत्तरदायी शासन |
-- |
सहयोग: स्वयं प्रधानमंत्री; भारतीय संघ में विलय |
14. यादव वंश (करौली)
|
शासक |
समय/तिथि |
राजनीतिक उपलब्धियाँ |
सांस्कृतिक उपलब्धियाँ |
केंद्रीय सत्ता से सहयोग/प्रतिरोध |
|
विजयपाल (संस्थापक) |
1040 ई. |
बयाना (भरतपुर) - राजधानी |
विजयमंदिर किला |
-- |
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अर्जुनपाल |
1348 ई. |
कल्याणपुर बसाया - वर्तमान करौली |
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-- |
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गोपालपाल |
-- |
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'मदनमोहन मंदिर' निर्माण |
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महाराजा हरबक्षपाल |
9 नवम्बर, 1817 |
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-- |
सहयोग (अधीनता): अंग्रेजों से संधि - राजस्थान की पहली रियासत |
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मदनपाल |
1854-1869 |
1857 - अंग्रेजों को सेना भेजी |
1865 - दयानन्द सरस्वती की राजस्थान में पहली यात्रा (मदनपाल के आग्रह पर) |
सहयोग: 'ग्रांड कमाण्डर ऑफ द ऑर्डर ऑफ Star of India' उपाधि |
|
गणेशपाल (अन्तिम) |
1940-1947 |
1945 - नवीन संविधान लागू |
-- |
सहयोग: भारतीय संघ में विलय |
15. प्रतिहार वंश
|
शासक |
समय/तिथि |
राजनीतिक उपलब्धियाँ |
सांस्कृतिक उपलब्धियाँ |
केंद्रीय सत्ता से सहयोग/प्रतिरोध |
|
नागभट्ट प्रथम (जालौर) |
730-756 ई. |
जालौर प्रतिहार प्रारम्भ; 'ग्वालियर प्रशस्ति' - 'नारायण' उपाधि - म्लेच्छों (बिलोच, अरब) के दमन हेतु |
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प्रतिरोध: म्लेच्छों/अरबों का दमन |
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वत्सराज |
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778 - उद्योतन सूरि - 'कुवलयमाला'; 783 - आचार्य जिनसेन - 'हरिवंश पुराण' - जालौर में |
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भोज (मिहिरभोज) |
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सिक्कों पर 'आदिवराह' विरुद |
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महेन्द्रपाल |
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दरबार - राजशेखर ('कर्पूरमंजरी') |
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राज्यपाल |
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प्रतिरोध: महमूद गजनवी ने कन्नौज पर आक्रमण |
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चन्द्रदेव गहड़वाल |
1093 ई. |
कन्नौज छीन - प्रतिहार शासन राजस्थान तक सिमटा |
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16. परमार वंश (आबू, जालौर, मालवा, वागड़)
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शासक |
समय/तिथि |
राजनीतिक उपलब्धियाँ |
सांस्कृतिक उपलब्धियाँ |
केंद्रीय सत्ता से सहयोग/प्रतिरोध |
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विमलशाह |
1031 ई. |
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आबू - आदिनाथ मंदिर |
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धारावर्ष |
1163-1219 |
आबू परमारों का शक्तिशाली शासक |
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सोमसिंह |
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शासन में तेजपाल - 'लूणवसही' नेमिनाथ मंदिर (देलवाड़ा) |
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मुंज (मालवा) |
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मेवाड़ शक्तिकुमार के शासन में आहड़ नष्ट; चित्तौड़ अधिकार |
'कवि वृष' |
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भोज (मालवा) |
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विजयी, विद्यानुरागी |
ग्रंथ - सरस्वती कण्ठाभरण, राजमृगांक, विद्वज्जनमण्डल, समरांगण, श्रृंगार मंजरी कथा, कूर्मशतक; चित्तौड़ - त्रिभुवन नारायण शिव मंदिर (मोकल मंदिर) |
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17. साका/जौहर (आत्मबलिदान) की घटनाएँ
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घटना |
समय/तिथि |
स्थान |
विवरण |
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प्रथम साका/जौहर |
1301 ई. |
रणथम्भौर |
हम्मीर की मृत्यु; रानी रंगादेवी के नेतृत्व में महिलाओं ने जौहर; अमीर खुसरो द्वारा उल्लेख; राजस्थान का पहला साका |
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जैसलमेर प्रथम साका |
1308 ई. |
जैसलमेर |
अलाउद्दीन खिलजी - कमालुद्दीन गुर्ग; महिलाओं ने जौहर |
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जैसलमेर द्वितीय साका |
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जैसलमेर |
मुहम्मद तुगलक; रावले दूदा, त्रिलोकसी वीरगति; जौहर |
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जैसलमेर अर्द्धसाका |
1550 ई. |
जैसलमेर |
अमीर अली विश्वासघात; भाटी विजयी - जौहर नहीं |
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चित्तौड़ प्रथम साका |
26 अगस्त, 1303 |
चित्तौड़ |
रावल रतनसिंह; पद्मिनी के नेतृत्व में 1600 क्षत्राणियों ने जौहर |
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चित्तौड़ द्वितीय साका |
1534 ई. |
चित्तौड़ |
बाघसिंह वीरगति; कर्मावती - 1300 महिलाओं के साथ जौहर |
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चित्तौड़ तृतीय साका |
24 फरवरी, 1568 |
चित्तौड़ |
जयमल, कल्ला राठौड़, फत्ता सिसोदिया; फूलकँवर के नेतृत्व में जौहर |
18. महत्वपूर्ण उपाधियाँ एवं विरुद
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उपाधि/विरुद |
प्राप्तकर्ता |
प्रदाता/स्रोत |
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वैरीघट्ट (शत्रुसंहारक) |
गोविन्द तृतीय (चौहान) |
'पृथ्वीराज विजय' |
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कवि बान्धव |
विग्रहराज चतुर्थ |
ज्यानक भट्ट |
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फर्जन्द (बेटा), 7000 मनसब |
मानसिंह (आमेर) |
अकबर |
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सवाई |
सवाई जयसिंह |
औरंगजेब |
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अमीर उल उमरा, राजा |
भारमल, भगवंतदास |
अकबर |
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रावराजा, 5000 मनसब |
सुर्जन हाड़ा (बूँदी) |
अकबर |
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रामराज, सरबुलन्दराय |
राव रतनसिंह (बूँदी) |
जहाँगीर |
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महाराव राणा |
बुद्धसिंह (बूँदी) |
बहादुरशाह |
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बाद रफ्तार (घोड़ा) |
माधोसिंह (कोटा) |
शाहजहाँ |
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मिर्जाराजा |
जयसिंह (आमेर) |
शाहजहाँ |
19. महत्वपूर्ण युद्ध एवं घटनाएँ (कालानुक्रम)
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युद्ध/घटना |
समय/तिथि |
परिणाम/महत्व |
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तराईन प्रथम |
1191 ई. |
पृथ्वीराज तृतीय ने गौरी को हानि पहुँचाई |
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तराईन द्वितीय |
1192 ई. |
पृथ्वीराज पराजित - भारत में तुर्की शासन की नींव |
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रणथम्भौर प्रथम आक्रमण |
1291 ई. |
जलालुद्दीन खलजी - हम्मीर ने सफल नहीं होने दिया |
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रणथम्भौर द्वितीय |
1299 ई. |
हम्मीर ने तुर्क सेना पराजित - नुसरत खाँ मारा गया |
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रणथम्भौर तृतीय |
1301 ई. |
विश्वासघात - हम्मीर मारा गया - प्रथम साका/जौहर |
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जालौर सिवाना |
1308 ई. |
अलाउद्दीन ने 'खैराबाद' नाम दिया |
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जालौर पतन |
1311 ई. |
बीका का विश्वासघात - कान्हड़देव मारा गया - 'जलालाबाद' |
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खानवा युद्ध |
1527 ई. |
बाबर की विजय - तोपखाना व तुलुगमा; सांगा पराजित |
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हल्दीघाटी |
1576 ई. |
मानसिंह (आमेर) ने मुगल सेना का नेतृत्व; प्रताप का प्रतिरोध |
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धर्मत युद्ध |
1658 ई. |
मुकुन्दसिंह (कोटा) - दारा पक्ष - वीरगति |
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सामूगढ़ |
1658 ई. |
बूँदी शत्रुशाल - दारा पक्ष - वीरगति |
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खजुआ युद्ध |
1659 ई. |
कोटा जगतसिंह - औरंगजेब पक्ष |
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पुरंदर की संधि |
1665 ई. |
मिर्जा राजा जयसिंह - शिवाजी ने मुगल अधीनता स्वीकार |
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गिंगोली युद्ध |
13 मार्च 1807 |
जगतसिंह (जयपुर) ने मारवाड़ मानसिंह परास्त |
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मांगरोल युद्ध |
1 अक्टूबर, 1821 |
कोटा किशोरसिंह - जालिमसिंह (अंग्रेज सहयोग) - किशोरसिंह परास्त |
20. प्रमुख निर्माण कार्य
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निर्माण |
निर्माता/शासक |
समय/तिथि |
स्थान/विशेषता |
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अजयमेरु (अजमेर) नगर |
अजयराज चौहान |
1113 ई. |
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आनासागर झील |
अर्णोराज |
1133-1155 |
अजमेर |
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संस्कृत पाठशाला |
विग्रहराज चतुर्थ |
1158-1163 |
अजमेर - बाद में ढाई दिन का झोंपड़ा |
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पिथौरागढ़ किला |
पृथ्वीराज तृतीय |
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दिल्ली |
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अचलगढ़ किला |
महाराणा कुम्भा |
1452 |
आबू |
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तारागढ़ किला |
बरसिंह हाड़ा |
1354 |
बूँदी - भित्ति चित्रों के लिए विख्यात |
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जंतर-मंतर |
सवाई जयसिंह |
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जयपुर - सबसे बड़ी; यूनेस्को विश्व धरोहर (जुलाई 2010) |
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जयपुर नगर |
सवाई जयसिंह |
1727 |
विद्याधर - नक्शा |
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नाहरगढ़/सुदर्शनगढ़ |
सवाई जयसिंह |
1734 |
जयपुर |
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जयबाण तोप |
सवाई जयसिंह |
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जयगढ़ - एशिया की सबसे बड़ी तोप |
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ईसरलाट |
सवाई ईश्वरीसिंह |
1747 |
सरगासूली - 7 मंजिला |
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हवामहल |
सवाई प्रतापसिंह |
1799 |
जयपुर - 953 खिड़कियाँ |
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अलबर्ट हॉल संग्रहालय |
सवाई रामसिंह द्वितीय |
1876 |
राजस्थान का प्रथम संग्रहालय |
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भवानी नाट्यशाला |
राजराणा भवानीसिंह |
1921 |
झालावाड़ |